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चंदौली : जिले के अलीनगर थाना क्षेत्र के निजी अस्पताल पर मरीज के परिजनों ने वहां के डॉक्टरों पर लगाया गंभीर आरोप।

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रिपोर्टर शोएब की रिपोर्ट चन्दौली, उत्तर प्रदेश 

• जिले के अलीनगर थाना क्षेत्र के निजी अस्पताल पर मरीज के परिजनों ने वहां के डॉक्टरों पर लगाया गंभीर आरोप।

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चंदौली : जनपद के अलीनगर थाना क्षेत्र के निजी अस्पताल पर मरीज के परिजनों ने वहां के डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं और बिना सही इलाज के अस्पताल से बाहर भगा देने की बात कही है।परिजनों का आरोप है कि पथरी के ऑपरेशन के दौरान नस काट देने से पेशाब के रास्ते से लगातार ब्लड आ रहा था। जब इस समस्या को लेकर डॉक्टर से उपचार की गुहार लगाई जा रही थी तो डॉक्टर ने मध्य रात्रि में दुर्व्यवहार करते हुए मरीज को स्ट्रेचर पर हॉस्पिटल से बाहर कर दिया। इसके बाद परिजनों ने थाना अध्यक्ष से न्याय की गुहार लगाते हुए कार्यवाही करने की मांग किया है। चंदौली जनपद के पुरवा आकोढ़ा कला गांव की निवासिनी प्रमिला देवी ने निजी अस्पताल के डॉक्टर पर गलत उपचार व दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए अलीनगर थाने में प्रार्थना पत्र दिया है कि उनके पति दरोगा गोड़ के किडनी में पथरी होने का ऑपरेशन मुगलसराय के निजी अस्पताल में डॉक्टरों के द्वारा किया गया।बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के दूसरे दिन ही पेशेंट के पेशाब के रास्ते ब्लड आने लगा. जिस पर परिजनों द्वारा डॉक्टर से गुहार लगाई गई तो डॉक्टर ने कहा कि ठीक हो जाएगा। पेशेंट को एक हफ्ते बाद डिस्चार्ज कर दिया गया और घर जाने के दूसरे दिन ही फिर ब्लड आने लगा। जिस पर डॉक्टर द्वारा पुनः भर्ती कर ब्लड चढ़ाया गया और ठीक होने की बात कही गई।बीते 4 अगस्त को पेशेंट की हालत बिगड़ने पर जब डॉक्टर से पूछा गया तो डॉक्टर मरीज एवं परिजनों से दुर्व्यवहार करते हुए आधी रात को पेशेंट को हॉस्पिटल से बाहर कर दिया और जांच रिपोर्ट आदि भी कुछ नहीं दिया।परिजनों ने पेशेंट की हालत गंभीर होने पर दूसरे अस्पताल में भर्ती कराकर उनका उपचार करा रहे हैं। मंगलवार को पीड़िता प्रमिला देवी अलीनगर थाने पर पहुंचकर उपचार के हर्जाने के साथ पेशेंट के साथ गलत उपचार एवं दुर्व्यवहार करने पर कानूनी कार्रवाई करने के लिए थाना अध्यक्ष से गुहार लगाई।परिजनों का आरोप है कि निजी अस्पताल की मनमानी एवं गलत उपचार के चलते अक्सर पेशेंट परेशान होते रहते हैं। वहीं ऊंची पहुंच और अपने मैनेजमेंट के चलते उनपर कोई कार्रवाई नहीं होती है। स्वास्थ्य विभाग भी इनके मामले पर चुप्पी साध लेता है।

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