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श्रीराम कथा के अमृत रस में सराबोर हुए श्रद्धालु, वनवास एवं केवट प्रसंग ने भाव विभोर किया

 

रिपोर्टर सोनू आगरा


श्रीराम कथा के अमृत रस में सराबोर हुए श्रद्धालु, वनवास एवं केवट प्रसंग ने भाव विभोर किया

बाबा रंगूराम धाम, कैलाशपुरी आगरा में चल रहे दिव्य श्रीराम कथा महोत्सव के पंचम दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला, श्रीधाम वृंदावन से पधारीं कथा व्यास पूज्या पं. गरिमा किशोरी जी ने अपने श्रीमुखारविंद से भगवान श्रीराम के वनवास एवं केवट प्रसंग का ऐसा हृदयस्पर्शी वर्णन किया कि श्रद्धालु भक्ति के अमृत रस में सराबोर हो उठे,
कथा व्यास ने कहा कि प्रभु श्रीराम का वनवास त्याग, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है, जबकि केवट प्रसंग यह संदेश देता है कि निष्काम प्रेम और सच्ची भक्ति के आगे स्वयं भगवान भी भक्त के प्रेम से बंध जाते हैं, उन्होंने प्रभु और केवट के मधुर संवाद का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, सेवा और समर्पण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी,
कथा के दौरान जैसे ही केवट द्वारा प्रभु श्रीराम के चरण पखारने का प्रसंग आया, पूरा कथा पंडाल जय श्रीराम, सियाराम मय सब जग जानी, बोलो रघुवीर की जय के जयघोष से गुंजायमान हो उठा, श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और वातावरण भक्तिमय हो गया,


इस अवसर पर स्वामी गुरमुख दास उदासीन जी ने कहा, श्रीराम कथा केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि मानव जीवन को धर्म, मर्यादा, प्रेम और सदाचार की दिशा देने वाली दिव्य जीवनशाला है, जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक रामकथा का श्रवण करता है, उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आता है,
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया तथा प्रभु श्रीराम के चरणों में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की,
सेवा मे रहे दास दीपक उदासीन, पं लोकेश शर्मा,श्याम भोजवानी, राजेश लालवानी,आर पी सिंह राजपूत,आर के जेतली,नन्दलाल छत्तानी,जय प्रकाश धर्माणी, विनोद लालवानी,लक्मण भावनानी, सुन्दर चेतवानी,
जयप्रकाश रामानी,
साहिल ,पवन,गुरमुख,
कौशल्या सिमरन,कीर्ति आकांशा, सौम्या, भाविका,अंजली आदि

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