अंकुर कुमार पांडेय
रिपोर्ट सत्यार्थ न्यूज
वाराणसी
ऊर्जा मंत्री बनाम UPPCL चेयरमैन: एके शर्मा का बड़ा हमला, बोले- गैर-जिम्मेदार फैसलों से सरकार हो रही बदनाम

उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार के भीतर बड़ा टकराव सामने आया है। ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने यूपी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के चेयरमैन आशीष गोयल को कड़े शब्दों में पत्र लिखकर उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
ऊर्जा मंत्री ने आरोप लगाया कि चेयरमैन ने बिना मंत्री को विश्वास में लिए बिजली उपभोक्ताओं पर फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट (FPPA) सरचार्ज में 10 प्रतिशत वृद्धि लागू कर दी, जिससे सरकार के खिलाफ नकारात्मक माहौल बना। मंत्री का कहना है कि इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी उन्हें मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया के माध्यम से मिली।
आंधी-तूफान के दौरान मुख्यालय छोड़ने पर भी सवाल
मंत्री ने अपने पत्र में मई के अंतिम सप्ताह में आए आंधी-तूफान के दौरान बिजली व्यवस्था चरमराने का जिक्र करते हुए कहा कि संकट की घड़ी में जब समीक्षा बैठक बुलाई गई तो चेयरमैन मुख्यालय से बाहर थे। इसके कारण बैठक ऑनलाइन आयोजित करनी पड़ी। उन्होंने इसे जनहित के विपरीत और गैर-जिम्मेदाराना आचरण बताया।
कुशल लाइनमैनों को हटाने का आरोप
ऊर्जा मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि अनुभवी और प्रशिक्षित लाइनमैनों को हटाकर अकुशल कर्मियों को रखा जा रहा है, जिससे बिजली व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने सहारनपुर समेत विभिन्न जिलों के उदाहरण देते हुए कहा कि इस प्रकार के फैसले तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नुकसान पहुंचा रहे हैं।
ऊर्जा मंत्री के पांच सख्त निर्देश
शासन की मंशा के विपरीत कार्यशैली तत्काल बंद की जाए।
- सरकार की छवि खराब करने वाले कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
- ट्रांसफर सीजन में विवादित कर्मियों का उचित स्थानांतरण किया जाए।
- मुख्यालय छोड़ने से पहले ऊर्जा मंत्री को सूचित किया जाए।
- बिजली से जुड़े बड़े फैसले लेने से पहले मंत्री को अवगत कराया जाए।राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस पत्र को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
- माना जा रहा है कि बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर सरकार अब और सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है।
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