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चेतना साहित्य एवं कला परिषद तथा हमफाउंडेशन गुना के संयुक्त तत्वाधान में काव्य गोष्ठी हुई संपन्न।

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न्यूज़ रिपोर्टर शाका नामदेव गुना

चेतना साहित्य एवं कला परिषद तथा हमफाउंडेशन गुना के संयुक्त तत्वाधान में काव्य गोष्ठी हुई संपन्न।

 

खबर गुना जिला मध्य प्रदेश से

गुना चेतना साहित्य एवं कला परिषद द्वारा पावस ऋतु के उपलक्ष्य में संजय खरे के निवास उद्गम रेसीडेंसी में वरिष्ठ कवि विष्णु साथी की अध्यक्षता, प्रमोद मेहरा शाखा अध्यक्ष हम फाउंडेशन, जितेन्द्र वर्मा प्रांतीय संपर्क प्रमुख हम फाउंडेशन के मुख्य आतिथ्य तथा डाक्टर लक्ष्मीनारायण बुनकर के विशेष आतिथ्य में कवि गोष्ठी संपन्न हुई। कार्यक्रम का आरंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित एवं माल्यार्पण कर किया गया।कवि गोष्ठी का संचालन नगर के जाने-माने शायर प्रेम सिंह प्रेम ने किया। सरस्वती वंदना हरीश सोनी ने प्रस्तुत की, संचालन करते हुए प्रेम सिंह प्रेम ने कहा कि कुदरत के करिश्मे कुछ इस तरह निराले हो गये, जो सड़क पर थे कभी दौलत वाले हो गये।रात दिन करता रहा सच्चाई से जो मेहनतकशी,इस दौर में उसे मुश्किल निवाले हो गये। वरिष्ठ कवि विष्णु साथी ने अपनी बात रखते हुए कहा चोर गिरोह बहुत सक्रिय हैं इनसे बचना शहरवासियों, हैं बाहर के सभी लुटेरे संगठित रहना शहरवासियों।
डाक्टर लक्ष्मीनारायण बुनकर ने भजन सुनाते हुए कहा कि किभज ले प्रभु को बंदेआई है यह बिरिया,बीत रही है धीरे-धीरे तेरी उमरिया। नरेंद्र भार्गव पद्म ने कहा अंबर से आकर हर बूंद धरा से पीछे, मेरा मन तुमसे क्यूं तरसे।
संजय खरे ने शेर पढ़ते हुए कहा की *समझती है दुनिया की मैं रब ढूंढता हूं, न मैं तब ढूंढता था न अब ढूंढता हूं।गुजरी उम्र सारी इसी कश्मकश में , मेरे जीने का क्या है सबब ढूंढता हूं। उमाशंकर भार्गव ने कहा हमें अपने अपने पूर्वजों की याद में एक वृक्ष लगाए,जब तक न हो वह पल्लवित उसका कवच बन जायें। श्रीमती संतोष ब्रह्मभट्ट ने कहा हर खुशी हर बहार तुमको मिले सदा साजन का प्यार तुमको मिले, हजारों वर्ष आये साजन का जन्मदिन हार डालने का हक सिर्फ तुमको मिले। गीतकार हरीश सोनी ने कहा कि प्रीत की पाती सजन तुमको सुनाना चाहता हूं, मैं तुम्हारी याद में कुछ गुनगुनाना चाहता हूं। रवि शर्मा बंजारा ने अपने विचारों को व्यक्त करते हुए कहा कि अब अपना हाल क्या कहें फिर वही सवाल क्या कहें,मिल के भी जो मिला नहीं अब उसका मलाल क्या कहें। कवि गोविन्द राव मोरे ने कहा गई बिजली होता दिल धुक्क, अंधेरा घुक्क पड़ा है धुक्क। श्रीमती रेखा श्रीवास्तव ने शेर पढ़ते हुए कहा कि वो बन के ख्याल फिक्रों से रहता है वो शख्स हरदम मेरे जहन में रहता है, जिसकी मौजूदगी में रहती है फिजायें वो गुलाब बनकर मेरे दिल के चमन में रहता है।इस अवसर पर डाक्टर अशोक गोयल, सूबेदार धर्मवीर सिंह, साक्षी ओझा, माया ओझा ने भी अपनी रचनाएं सुनाई। काव्य गोष्ठी में श्रीमती रानी दुबे, जगदीश प्रसाद शर्मा, मिहिर खरे, दिव्यांशी खरे, नारायण लाल मैयर,दीपक शर्मा, नरेंद्र, देवेन्द्र भार्गव, पंडित मनोज शर्मा सहित मोहल्ले के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। संजय खरे को उनके जन्मदिन पर शाल, श्रीफल,माला पहनाकर चेतना साहित्य एवं कला परिषद के सदस्यों तथा हम फाउंडेशन के सदस्यों ने जन्मदिन की बधाई दी, लक्ष्मीनारायण बुनकर ने संजय खरे के जन्मदिन पर लिखे अभिनंदन पत्र का वाचन कर भेंट किया। अंत में हम फाउंडेशन की प्रांतीय महासचिव रेखा श्रीवास्तव ने सभी का आभार व्यक्त किया और कहा प्रतिकूल मौसम रहते हुए आप मेरे घर पधारे मैं इसके लिए आप सभी का तहेदिल से शुक्रिया अदा करती हूं।

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