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भानुप्रतापपुर   सर्व आदिवासी समाज सर्व सभी समाज के लोगों ने मिलकर नारी शक्ति की परचाईका जल जंगल और पहाड़ों की रानी के नाम से प्रसिद्ध धर्म रक्षक वीरगना रानी दुर्गावती की पुण्यतिथि पूजा अर्चना माल्यार्पण कर जय घोष के साथ मनाई गई,       

भानुप्रतापपुर से संवाददाता पुनीत मरकाम  की रिपोर्ट    ✍️ ✍️                                          भानुप्रतापपुर   सर्व आदिवासी समाज सर्व सभी समाज के लोगों ने मिलकर नारी शक्ति की परचाईका जल जंगल और पहाड़ों की रानी के नाम से प्रसिद्ध धर्म रक्षक वीरगना रानी दुर्गावती की पुण्यतिथि पूजा अर्चना माल्यार्पण कर जय घोष के साथ मनाई गई,                                               भानुप्रतापपुर= आज दिनांक 24 जून को रानी दुर्गावती जी की पुण्यतिथि गोंडवाना समाज एवं सर्व आदिवासी समाज सर्व सभी समाज के लोगों ने मिलकर नारी शक्ति की परचाईका जल जंगल और पहाड़ों की रानी के नाम से प्रसिद्ध धर्म रक्षक वीरगना रानी दुर्गावती की पुण्यतिथि पूजा अर्चना माल्यार्पण कर जय घोष के साथ मनाई गई,ज्ञात है किस्वाधीनता एवं मातृभूमि के गौरव के लिए अपने प्राणों को अर्पित करने वाली महान वीर गाना रानी दुर्गावती ने धर्म की रक्षा और स्वतंत्रता के लिए युद्ध भूमि को चुनने वाली रानी दुर्गावती की मृत्यु 24 जून 1564 को हुई थी महारानी दुर्गावती कालिंजर के राजा कीर्ति सिंह चंदेल की एकमात्र संतान थी महोबा राठ गांव में 1524 सत्र क़ो दुर्गा अष्टमी के दिन जन्म होने के कारण उनका नाम दुर्गावती रखा गया नाम के अनुरूपी तेज साहस और सुर के कारण उनकी प्रसिद्ध सब ओर फैल गई इनका विवाह गढ़ मंडला के प्रतापी राजा संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह से हुआ बावन गढ़ तथा 35.000 गांव वाले गढ़ साम्राज्य का क्षेत्रफल 67.500 वर्गमील था यद्यपि दुर्गावती के मायके और ससुराल पक्ष की जाती भिन्न थी फिर भी दुर्गावती की प्रसिद्ध से प्रभावित होकर राजा संग्राम शाह ने उसे अपनी पुत्रवधू बना लिया पर दुर्भाग्य वास विवाह के 4 वर्ष बाद ही राजा दलपत शाह का निधन हो गया उसमें दुर्गावती की गोद में तीन वर्षी नारायण ही था रानी ने स्वयं ही गढ़ मंडला का शासन संभाल लिया उन्होंने अनेक मंदिर मठ कुएं बावड़ी तथा धर्मशालाएं बनवा वर्तमान जबलपुर उनके राज्य का केंद्र था उन्होंने अपनी दासी के नाम पर चेरी लाल अपने नाम पर रानीताल तथा अपने विश्वास दीवान आधार सिंह के नाम पर आधारसिंह के नाम पर आधारताल बनवाया 24 जून 1564 को मुगल सेना ने फिर हमला बोला आज रानी का पक्ष दुर्बल था अतः रानी ने अपने पुत्र नारायण को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया तभी एक तीर उनकी भुज में लगा रानी ने उसे निकाल फेंका दूसरे तीर ने उनकी आंख को वेध दिया रानी ने इसे भी निकाला पर उनकी नोक आंख में ही रह गई तभी तीसरा तीर उनकी गर्दन में आकर धंस गया रानी ने अंत समय निकट जानकर वजीर आधार सिंह से आग्रह किया कि वह अपनी तलवार से उनकी गर्दन काट दे पर वह इसके लिए तैयार नहीं हुए अतः रानी अपनी कतर स्वयं ही अपने सीने में भोकर आत्म बलिदान के पथ पर चढ़ गई इस अवसर पर समाज के महिला पुरुष एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे! जिसमें ठाकुर चंद्रिका प्रसाद कोरेटी रिटायर्ड प्रोफेसर कीड़ा अधिकारी राधेलाल नुरेटी हेमन्त नेताम सीएमओ नगर पंचायत रुक्मणी ध्रुव बृजवती मतलामिन श्रीमती हुपेंडी श्रीमती करंगा कमलेश गावडे नगर पंचायत उपाध्यक्ष भाजपा मंडल अध्यक्ष नरोत्तम सिंह चौहान शिवसेना प्रदेश महासचिव चंद्रमौली मिश्रा भाजपा मंडल महामंत्री डिगेश खापर्डे जनपद पंचायत उपाध्यक्ष सुनारामतेता कोमल हुपेंडी चैन सिंह सॉरी उर्मिला सॉरी काशीराम दर्रों पदाधिकारी आर. एल. लाल सिंह पोटाई अशोक कुमार तेता काशीराम दरों, राधे मंडावी सामरत दरों महिला प्रभाग से श्रीमती अर्मिला सोरी ,नीतू लाटिया  बड़ी संख्या में समाज के महिला पुरुष उपस्थित थे

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