राज्यशास्त्र कनिष्ठ महाविद्यालय परीषद का चौथा वार्षिकोत्सव समारोह संपन्न
(रामचंद्र मुंदाने, अमरावती प्रतिनिधि)
राज्यशास्र कनिष्ठ महाविद्यालय परिषद का चतुर्थ वार्षिकोत्सव कार्यक्रम हाल ही में संपन्न हुआ। इस समारोप की अध्यक्षता करते हुए परिषद के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. सुमित पवार थे । इन कार्यक्रमों में मुख्य वक्ता के रूप में शिवाजी विद्यापीठ, कोल्हापुर के राज्यशास्र विभाग के प्रमुख तथा राजनीती विश्लेषक डॉ. प्रकाश पवार सर ने मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम की शुरुआत संविधान के उद्देश्य के वाचन से हुई, इसके बाद सेवानिवृत्त प्रो. बालासाहेब चौगुले का सम्मान किया गया.
भारतीय संविधान पश्चिमी संविधानों का उधार उसनवार नहीं है प्रो. डॉ। प्रकाश पवार
इस कार्यक्रम का मार्गदर्शन करते हुए राजनीतिक विश्लेषक डाॅ. प्रकाश पवार के अनुसार, भारतीय संविधान पश्चिमी संविधानों का उधार नहीं है, बल्कि इसे भारतीय लोगों की आशाओं, आकांक्षाओं, जरूरतों और मांगों के अनुसार तैयार किया गया है। भारतीय संविधान भारत के प्राचीन मध्ययुगीन साहित्य और संस्कृति से प्राप्त मूल्यों को स्थापित करता है। साथ ही भारत में भाषा विकास की माँग प्राचीन काल से ही की जाती रही है। इसी के परिचायक के रूप में भारतीय संविधान में क्षेत्रीय भाषाओं को मान्यता दी गई है। इसलिए
राज्यशास्त्र परिषद के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. प्रकाश पवार सर ने इयत्ता ग्यारवी , बारवी के पाठ्यक्र से हठाये गये भारत के संविधान के उस हिस्से को शामिल करने की मांग राज्यशास्त्र परिषद की तरफ से की गई और प्रथम अध्याय की रूपरेखा डॉक्टर प्रकाश पवार ने रखी।
इस अवसर पर जूनियर कॉलेज राजनीति विज्ञान परिषद की चौथी वर्षगांठ के अवसर पर प्रो. संजय सुतार, प्रो. सुरेश नारायणे, प्राचार्य शरद जोगी, प्रो. डॉ. सुनील राठौड़, प्रो. कैलास वाघ, प्रो. बबीता पोटदुखे, प्रो. सरगर, प्रो. अमर चव्हाण सहित बड़ी संख्या में महाराष्ट्र के राजनीतिशास्त्री भाई-बहन उपस्थित थे। कार्यक्रम की प्रस्तावना एवं परिचय प्रो. कार्यक्रम का संचालन प्रफुल्ल श्रीखंडे, प्रो. सुदर्शन पाटिल ने प्रोफेसरो को धन्यवाद दिया. विजय वाघमोड़े का मानना था।


















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