भानुप्रतापपुर फर्जी बिल के नाम पर सरपंच-सचिव लगी सरकार को चूना
पुनीत मरकाम की खास रिपोर्ट भानुप्रतापपुर /कन्हारगांव गांव के सर्वांगीण विकास के लिए पंचायती राज का गठन किया गया है, ताकि गांव के लोगों की समस्या को आपसी बातचीत में समझा जा सके और गांव की छोटी, बड़ी समस्या को पंचायत के सरपंच-सचिव, ग्रामवासी आपस में दूर कर उपलब्ध। इसके लिए ग्राम पंचायत में बुनियादी चौदहवें वित्त व पंचायत कोकर भुगतान की योजनाओं से पंचायत की खाते में राशि आती है, जिसके अनुसार पंचायत की आवश्यकता के अनुसार खर्च किया जाता है, लेकिन ग्राम पंचायत कन्हारगांव में इस योजना का पैसा विकास के बजाय फर्जी बिल लगाया गया है। है, जो सरकार व जनता के पैसे को सरपंच, सचिव व संबंधित विभाग में बैठे आला अधिकारी की मिलीभगत है। भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत कन्हारगांव में फर्जी बिल लगाकर जनता के विकास के घरेलू खतरे में पड़े हैं। ऐसे ही एक मामला ब्लॉक मुख्यालय से लगा ग्राम पंचायत कन्हारगांव का है जहां सरपंच और सचिव द्वारा सरकारी राशि की जा रही है बंदरबांट, जब इसकी जानकारी लेने के लिए ग्राम पंचायत कन्हारगांव में सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदन किया गया तो वह जानकारी देने के लिए पहले तो मना कि उसके बाद जब प्रथम अपील का आवेदन जनपद पंचायत में लगाया गया, तब जाकर जानकारी प्राप्त हुई, जानकारी को अध्ययन करने से पता चलता है कि शासन से जो राशि दी जाती है उसका उपयोग कैसे किया जाता है, आधी अधूरी जानकारी मिलने के बाद जब पता चला कि यहां आधे से अधिक बिल फर्जी तरीके से निकला है, तो आवेदनकर्ता द्वारा सूचना के अधिकार में मूल राशि की जानकारी प्राप्त की गई थी, पर जनसूचना अधिकारी (सचिव) जानकारी देने से बच रहे थे।
जब आवेदनकर्ता द्वारा यह जानकारी प्रथम अपील करते हुए जनपद पंचायत में आवेदन किया गया तो पता चला कि आधे से अधिक बिलों पर बिलिंग करने की तिथि ही नहीं लिखी गई है, इसलिए यह भी कहीं न कहीं गलत तरीके से राशि का आह्वान किया जा सकता है कि यह बिल फर्जी तरीकों से आहरण किया गया है, इसकी जानकारी के लिए जब सचिव को फोन किया गया तो उन्होंने फोन ही जरूरी नहीं समझा।
बक्स सरपंच-सचिव द्वारा फर्जी भुगतान कर दिया गया। ग्राम पंचायत में आज भी मूलभूत समस्या बनी हुई है। जिसके समाधान के लिए घर पर सरकारी धन का खुला प्रावधान सरपंच और सचिव के द्वारा किया जा रहा है। जिस पर कोई भी अंकुश नहीं लगाया जा रहा है। ग्राम पंचायत के सरपंच के द्वारा पंचायती राज अधिनियम को किनारे करते हुए अपने नियम पंचायत में चल रहे हैं। पंचायत में व्यय करने के लिए जो राशि आती है वह पंचायत अधिकारी के लिए चार्जगाह साबित हो रही है। पंचायती राज अधिनियम के सभी नियम अपराधियों को किनारे कर अपने कानून चलाने वाले कोई अंकुश लगाने वाले नहीं हैं।


















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