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बांसवाड़ा-गर्भवती महिलाओं को ओपीडी में दी विशेष सेवाएं, 3314 को मिला लाभ

गर्भवती महिलाओं को ओपीडी में दी विशेष सेवाएं, 3314 को मिला लाभ

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान मनाया
पूर्णा नंद पांडेय
बांसवाड़ा।
जिले में गुरूवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान मनाया गया। सभी राजकीय अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को ओपीडी में विशेष सेवाएं दी गई। जिले में एक ही दिन में .3314 गर्भवती महिलाओं ने भी अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का परिचय दिया और अपनी सभी जांचें करवाई। चिकित्सकों ने भी जांच के उपरान्त आवश्यक दवाओं का निशुल्क वितरण किया और पोषण संबंधित सलाह दी। पूरे राज्य के 27 जिलों में इसके लिए सघन निरीक्षण अभियान भी चला, जिसमें चेक लिस्ट के आधार पर जांच की। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान हर माह की 9,18 और 27 तारीख को मनाया जाता है। 9 तारीख को अमूमन सभी गर्भवती महिलाएं सरकारी अस्पतालों में अपने स्वास्थ्य की जांच करवाती है। जिससे प्रसव के दौरान और बाद में किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एचएल ताबियार ने बताया कि जिले के सभी बीसीएमओ और मेडिकल ऑफिसर ने अपने अधीन आने वाले अस्पतालों का निरीक्षण किया। यहां उन्हांेने चिकित्सा संस्थान के भवन की स्थिति, साफ-सफाई, प्रसूति नियोजन दिवस, गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व स्वास्थ्य जांच, शिशु टीकाकरण, चिकित्सा संस्थान में उपलब्ध सुविधाओं तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को लेकर चिकित्सा संस्थान की उपलब्धि आदि को देखा। इसके आधार पर तैयार रिपोर्ट के अनुसार सुविधाओं को और बेहतर बनाने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। निरीक्षण के दौरान चिकित्सा संस्थानों की मौसमी बीमारियों एवं लू व तापघात से निपटने की तैयारियों का भी अवलोकन किया गया।
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का उददेश्य चिकित्सक द्वारा सभी गर्भवती महिलाओं की दूसरी या तीसरी तिमाही में कम से कम एक प्रसवपूर्व जांच सुनिश्चित की जा सके। किसी भी मौजूदा नैदानिक स्थिति जैसे एनीमिया, गर्भावस्था प्रेरित उच्च रक्तचाप, गर्भकालीन मधुमेह आदि का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना है। डीपीएम ललित सिंह झाला ने बताया कि जिले के 84 संस्थानों में 3314 गर्भवती महिलाओं का पंजीयन किया गया है। जिसमें टीटी वन, टीटी टू टीका, एचआईवी जांच, एनमिया जांच, शुगर, ब्लड प्रेशर सहित विभिन्न स्तरों पर जांच कर हाईरिस्क की पहचान की गई। 130 महिलाएं ऐसी पाई गई है जिन्हें हाईरिस्क में रखा गया है। इनका विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उपचार किया जाएगा और फॉलोअप लिया जाएगा। प्रयास किए जाएंगे कि प्रसव तक वह हाईरिस्क से बाहर आ जाए।

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