प्रशासनिक शासन समाप्त होने के बाद अब सांगली, मिरज और कुपवाड नगर निगमों में राजनीति का दखल हो गया है। महायुति ने सरकार बनाई है। इसके साथ ही स्थायी समिति और अन्य समितियों के अध्यक्षों समेत सभी सदस्यों का चुनाव भी संपन्न हो चुका है। अब ये नवनियुक्त पदाधिकारी अपने दल को संवारने में जुट गए हैं। कुछ साल पहले यानी 7-8 साल पहले जीर्णोद्धार किया गया यह दल अब इन पदाधिकारियों को पुराना लगने लगा है। हाल ही में महिला एवं बाल कल्याण अध्यक्ष के भवन के सौंदर्यीकरण पर लाखों रुपये खर्च किए गए। अब विश्वसनीय खबर है कि वे मिराज स्थित संभागीय कार्यालय में भी ऐसा ही भवन बनवाना चाहते हैं। इस सौंदर्यीकरण के लिए आवश्यक धन तो सरकार का है, यानी नागरिकों की जेब से करों के रूप में, लेकिन इसकी परवाह कौन करता है? अब जल्द ही अन्य अधिकारियों को भी एक टीम से सुसज्जित किया जाएगा, जिसमें काफी पैसा खर्च होगा। लेकिन अगर शहरों के विकास के लिए जरूरी चीजों पर पैसा खर्च नहीं किया गया तो इसमें दुर्भाग्य क्या होगा?
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