(दुद्धी/सोनभद्र रिपोर्ट: नितेश कुमार)
सोनभद्र स्थित ऐतिहासिक किला परिसर के बगल में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्य में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, लेकिन शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
स्थानीय सूत्रों व मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार निर्माण में जिस बोल्डर का प्रयोग किया जा रहा है, वह मानक के अनुरूप नहीं है। आरोप है कि यह बोल्डर जंगल क्षेत्र से अवैध रूप से लाया गया है, जो न तो गुणवत्ता की कसौटी पर खरा उतरता है और न ही PWD के निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप है।
अधिकारियों को दिखाने के लिए अलग से रखी गई “दिखावटी टाली”
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब विभागीय अधिकारी निरीक्षण के लिए पहुंचते हैं, तो उन्हें दिखाने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले बोल्डरों की एक अलग टाली (डंप) मौके पर रख दी जाती है। जबकि वास्तविक निर्माण कार्य में घटिया, टूटे-फूटे और असमान आकार के बोल्डरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि अधिकारियों को जानबूझकर गुमराह किया जा रहा है।
शिकायत के बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस संबंध में पूर्व में भी शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक न तो निर्माण कार्य में सुधार हुआ और न ही किसी प्रकार की जांच की गई। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और ठेकेदार की मिलीभगत पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरकारी धन और सुरक्षा दोनों पर खतरा
मानकविहीन सामग्री से कराया गया यह निर्माण भविष्य में कभी भी क्षतिग्रस्त हो सकता है, जिससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी होगी बल्कि आम जनता की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। किला क्षेत्र ऐतिहासिक और संवेदनशील माना जाता है, ऐसे में लापरवाही और भी गंभीर मानी जा रही है।
प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी सोनभद्र से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही दोषी ठेकेदार, संबंधित अभियंता और निरीक्षण अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लग सके।

















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