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मध्यप्रदेश में डायल 100 की विदाई और डायल 112 की नई शुरुआत: अनुबंध, लागत और चुनौतियों का विस्तृत विश्लेषण

मध्यप्रदेश में डायल 100 की विदाई और डायल 112 की नई शुरुआत: अनुबंध, लागत और चुनौतियों का विस्तृत विश्लेषण

भोपाल: मध्यप्रदेश में आपातकालीन सेवाओं का चेहरा बदलने वाला है। 15 अगस्त 2025 से डायल 100 सेवा को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा और इसकी जगह डायल 112 सेवा शुरू हो जाएगी। यह बदलाव केंद्र सरकार की निर्भया योजना के तहत पैन-इंडिया इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ERSS) का हिस्सा है, जहां ‘112’ को देशभर में एकल आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर बनाया गया है। मध्यप्रदेश उन 16 राज्यों में शामिल था, जिन्होंने फरवरी 2019 में ERSS को लागू किया था। अब इस सेवा का संचालन जीवीके इमरजेंसी मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (GVK EMRI) को सौंपा गया है, जो पहले से ही राज्य में 108 एम्बुलेंस सेवाएं चला रही है। लेकिन इस बदलाव के पीछे पुरानी डायल 100 सेवा की कमियां और नई सेवा की उम्मीदें क्या हैं? आइए विस्तार से जानते हैं।

*डायल 100 सेवा: BVG इंडिया लिमिटेड को अनुबंध और CAG की रिपोर्ट में खुलासे*
डायल 100 सेवा की शुरुआत नवंबर 2015 में हुई थी, जिसका उद्देश्य पुलिस, फायर और मेडिकल सहायता को एक नंबर पर उपलब्ध कराना था। इस सेवा का संचालन BVG इंडिया लिमिटेड को सौंपा गया था। अनुबंध की अवधि 5 वर्ष (30 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2020) थी, जिसे दिसंबर 2021 तक बढ़ाया गया। कुल अनुबंध राशि ₹541.03 करोड़ थी, जिसमें सेंट्रलाइज्ड कॉल सेंटर, कमांड कंट्रोल रूम और फ्लीट मैनेजमेंट शामिल थे।
वार्षिक परिचालन लागत औसतन ₹104.3 करोड़ थी (2015-20 के दौरान), जिसमें प्रत्येक फर्स्ट रिस्पॉन्स व्हीकल (FRV) के लिए फिक्स्ड कॉस्ट ₹68,500 प्रति माह और वेरिएबल कॉस्ट (मुख्यतः ईंधन) ₹18,900 प्रति माह शामिल थे। कुल मिलाकर, 2013-20 के दौरान विभाग ने ₹534.67 करोड़ का व्यय किया, जबकि बजट आवंटन ₹596.76 करोड़ था। सेवा में लगभग 700-800 टाटा सफारी जैसी SUV गाड़ियां तैनात थीं, लेकिन CAG (कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) की 2021 रिपोर्ट में कई अनियमितताएं उजागर हुईं।


CAG रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:
– *वित्तीय अनियमितताएं*: मई 2019 से जनवरी 2020 तक सिस्टम इंटीग्रेटर (BVG) के बिलों से ₹0.90 करोड़ अनुचित रूप से रोका गया, जबकि SLA (सर्विस लेवल एग्रीमेंट) रिपोर्ट न उत्पन्न करने पर ₹0.75 करोड़ की पेनल्टी लगाई जानी चाहिए थी। GPS न काम करने पर ₹15 लाख रोके गए, लेकिन पेनल्टी नहीं लगाई गई।
– *ओवरपेमेंट का खतरा*: ईंधन बिलों के लिए लॉगबुक की जांच में जोखिम पाया गया। 103 FRV की भौतिक जांच में 28 वाहनों में माइलोमीटर और लॉगबुक रीडिंग में 10 किमी से अधिक अंतर था, जो ओवरपेमेंट का संकेत देता है।
– *फंड का दुरुपयोग*: डायल 100 सेंट्रल कंट्रोल रूम निर्माण के लिए ₹12.10 करोड़ 2014-16 में जारी किए गए, लेकिन निर्माण जून 2018 तक शुरू नहीं हुआ और कोविड-19 के कारण रुका रहा। इससे फंड 2.5 वर्ष से अधिक समय तक बेकार पड़े रहे।
– *परिचालन कमियां*: FRV की उपलब्धता 95% से कम रही (1-8% ऑफ-रोड), रिस्पॉन्स टाइम लक्ष्य से अधिक (शहरी क्षेत्र में 24 मिनट बनाम 5 मिनट, ग्रामीण में 56 मिनट बनाम 30 मिनट)। केवल 20% कॉल एक्शनेबल थे, और उपकरणों की कमी (जैसे 32% FRV में MDT काम नहीं कर रहा, फर्स्ट एड बॉक्स गायब) पाई गई।
– *चयन प्रक्रिया में विवाद*: परामर्शदाता KPMG का BVG के साथ पूर्व संबंध था, जिसे छिपाया गया, और टेंडर से पहले DPR (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) फाइनल नहीं की गई।

इन कमियों के कारण सेवा अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाई, जिससे सरकार को बदलाव का फैसला लेना पड़ा।

*डायल 112 सेवा: GVK EMRI को 5 वर्ष का अनुबंध, 1200 नए वाहन*
15 अगस्त 2025 से शुरू होने वाली डायल 112 सेवा का संचालन GVK EMRI को दिया गया है, जो राज्य में 108 एम्बुलेंस सेवा के अनुभव के आधार पर चुनी गई। अनुबंध की अवधि 5 वर्ष है, और इसमें 1200 नए वाहन तैनात किए जाएंगे—700 फोर-व्हीलर (जैसे बोलेरो नियो) और 500 मोटरसाइकिल। ये वाहन GPS, वायरलेस रेडियो, डिजिटल नेविगेशन और सेंट्रल सर्वर से जुड़े होंगे, ताकि कॉलर की लोकेशन ट्रेस कर तुरंत मदद पहुंचाई जा सके.

अनुबंध की सटीक राशि आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुमान के आधार पर प्रतिवर्ष 200-300 करोड़ रुपये की लागत हो सकती है। यह अनुमान 1200 वाहनों की खरीद, रखरखाव, कर्मचारी वेतन (कॉल सेंटर और ड्राइवर), अत्याधुनिक तकनीक और 24/7 संचालन को ध्यान में रखकर लगाया गया है। डायल 100 की तुलना में यह अधिक है, क्योंकि वाहनों की संख्या बढ़ी है और तकनीक उन्नत की गई है। GVK का लक्ष्य रिस्पॉन्स टाइम को 15-20 मिनट तक कम करना है, खासकर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में जहां मोटरसाइकिलें उपयोगी होंगी।

*क्यों जरूरी था बदलाव?*
पुलिस महानिदेशक के अनुसार, डायल 112 का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा बढ़ाना है, जो निर्भया योजना का मुख्य फोकस है। डायल 100 में 55% कॉल महिलाओं से आती थीं, मुख्यतः घरेलू हिंसा, छेड़छाड़ और महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित। सेवा ने पिछले एक वर्ष में 15,000 रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स की जान बचाई, लेकिन CAG रिपोर्ट की कमियों ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। नई सेवा पैन-इंडिया स्टैंडर्ड पर आधारित होगी, जहां एक नंबर से पुलिस (100), फायर (101), स्वास्थ्य (108) और महिलाओं की सुरक्षा (1090) जैसी सेवाएं उपलब्ध होंगी।

*नागरिकों की चिंताएं और सुझाव*
भोपाल, इंदौर और जबलपुर जैसे शहरों में कई नागरिकों ने कहा कि डायल 100 की तरह नई सेवा का प्रचार-प्रसार व्यापक रूप से किया जाना चाहिए, ताकि लोग 112 नंबर का उपयोग आसानी से कर सकें। कुछ ने पुलिस भर्ती बढ़ाने और संसाधनों को मजबूत करने की मांग की। विशेषज्ञों का मानना है कि CAG जैसी रिपोर्टों से सबक लेकर नई सेवा में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

*आगे की चुनौतियां और उम्मीदें*
डायल 112 सेवा मध्यप्रदेश में आपातकालीन प्रतिक्रिया को नया आयाम दे सकती है, लेकिन इसका सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या पुरानी गलतियां दोहराई जाएंगी। सरकार को अनुबंध की निगरानी, SLA का सख्त पालन और नागरिक फीडबैक पर ध्यान देना होगा। यदि सब ठीक रहा, तो यह सेवा न केवल अपराधों पर अंकुश लगाएगी बल्कि जनता का विश्वास भी बढ़ाएगी।

(नोट: अनुबंध राशि और लागत के आंकड़े CAG रिपोर्ट और उपलब्ध सूत्रों पर आधारित हैं। प्रकाशन से पहले पुलिस विभाग से आधिकारिक पुष्टि की जा सकती है।)

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