महराजगंज,करोड़ो रुपए पानी में बहते रहे,लेकिन समस्या बरकरार रहीं
महराजगंज:* नेपाल के पहाड़ी इलाकों समेत महराजगंज में बृहस्पतिवार की रात से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से जिले की सभी नदियां उफना गईं हैं।नेपाल की पहाड़ी से निकल कर महराजगंज में बहने वाले महाव नाले के पानी का जलस्तर बीती रात खतरे के निशान को पार गया।महाव नाला क्षेत्र से सटे दर्जनों गांवों के ग्रामीणों की रात दहशत में गुजारी।पूरी रात ग्रामीण जागते रहे।भगवान का शुक्र है कि महाव नाले का तटबंध टूटा नहीं,नहीं तो बाढ़ की विभीषिका ही लिखी जाती,और चारो तरफ चीख पुकार ही सुनाई देती।
मिली जानकारी अनुसार रविवार की सुबह सूरज की लालिमा जब धरती पर इकारती हुईं अठखेलियां करती हुईं अपनी प्रकाश पुंज को फैलाने को आतुर थीं,उसी वक्त राहत भरी खबर मिली कि महाव नाला का जल स्तर घट रहा है।फिर भी ग्रामीणों में भय का माहौल अभी बना हुआ है।ग्रामीणों की मानें तो नेपाल की पहाड़ों पर एक – दो दिन अगर और बारिश हुई तो महाव नाला का पानी विकराल रूप ले सकता है।
हालांकि खबर मिलते ही महराजगंज के जिलाधिकारी अनुनय झा, पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीना,ए.डी.एम. डॉ पंकज कुमार वर्मा और सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता राजीव कपिल मौके पर पहुंचे है।
जिले के साथ नेपाल की पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश से महाव नाला में आई बाढ़ के कारण बह कर आया एक विशाल पेड़ महाव नाला के पुल में ही फंस गया। जिससे महाव नाला के पानी के बहाव में काफी समस्या उत्पन्न हो गई।
मौके पर पहुंचे अधीक्षण अभियंता आमोद कुमार सिंह ने किसी तरह जेसीबी के सहारे विशाल पेड़ को हटवाया तब जाकर पानी के बहाव का रास्ता साफ हो सका।लगातार बारिश के कारण फिलहाल नदियों का जलस्तर अब भी दहशत पैदा करने वाला है मौके पर जिला प्रशासन अधिकारी नजर बनाए हुए हैं।
बता दें कि नेपाल की पहाड़ों से निकलने वाले महाव नाले की समस्या आज भी जश की तश बरकरार है। समय के साथ पीढ़ियां गुजर गईं,सरकारें बदलती रहीं,तमाम कोशिश होते रहे लेकिन महाव नाले में हर साल आने वाले बाढ़ की समस्या का समाधान नहीं निकला।
महाव नाले की साफ-सफाई और बंधे के मरम्मत पर हर साल करोड़ों रूपए पानी में बहाए जाते रहे हैं।लेकिन समस्या उसी तरह बरकरार है,इतना है की जिम्मेदारों को बारिश के समय बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोग याद आ जाते हैं।
यहां के दर्जन भर गांवों के किसानों को हर वर्ष नुकसान उठाना पड़ता है। किसानों की धान की फसल हर साल बाढ़ की पानी में डूब जाता है,जिससे करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ता है। किसानों की पूरी फसल बाढ़ में आई सिल्ट से पट जाती है। विकास की गंगा बहाने वाले जनप्रतिनिधि और जिले के अधिकारी बार-बार यह दावा भी करते रहे हैं की इस साल यहां के किसानों को बाढ़ से निजात मिलेगी पर किसानों के हाथ कुछ नहीं लगता है। किसानों की गाढ़ी कमाई इसी बाढ़ में डूब जाती है और हर साल किसान रोने के लिए मजबूर रहता है।
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