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कांकेर गोंड़ी भाषा के संरक्षण के लिए दिल्ली से महत्वपूर्ण पहल: नवा रायपुर में कार्यशाला आयोजित

         सत्यार्थ न्यूज़ से पुनित मरकाम कांकेर (छत्तीसगढ़) भानुप्रतापपुर ✍️ ✍️ ✍️                                                                                          गोंड़ी भाषा के संरक्षण के लिए दिल्ली से महत्वपूर्ण पहल: नवा रायपुर में कार्यशाला का आयोजन

कांकेर (छत्तीसगढ़) ✍️✍️✍️
दिल्ली से प्राप्त मान्यता के अनुसार, आदिम जाति अनुसंधान संस्थान, अटल नगर, नवा रायपुर में 22 जुलाई 2024 से 27 जुलाई 2024 तक गोंड़ी भाषा व्याख्या कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला गोंड़ी भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।

प्राचीन काल में भारत में 75 प्रतिशत लोग गोंड़ी भाषा पाए जाते थे, लेकिन वर्तमान में यह भाषा विलुप्त हो चुकी है। इस संकट को देखते हुए, भारत सरकार ने गोंडी भाषा को संरक्षित करने और संरक्षित करने का निर्णय लिया। इस विद्यालय का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को गोंड़ी भाषा का ज्ञान प्रदान करना और इस भाषा को पुनर्जीवित करना है।

इस पहल के तहत, आदिम जाति अनुसंधान संस्थान में गोंडी भाषा के विशेषज्ञ द्वारा कक्षा 3 से कक्षा 10 तक हिंदी विषयों का गोंड़ी भाषा में अनुवाद किया जा रहा है। यह कदम जशनी समाज की भाषा और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

गोंड़ी भाषा और संस्कृति को सुरक्षित करने के इस प्रयास से आशा है कि इस भाषा को फिर से स्थापित किया जाएगा और आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान को नया जीवन मिलेगा।

इस विद्यालय में कांकेर जिले के दुर्गूकोंदल विकासखंड के जौहर लाल उइके, संग्राम कल्लो, सोमसिंह नरेटी और दलसुराम नरेटी भी शामिल रहे। इस महत्वपूर्ण पहल को देखने पर यह विशेष रूप से घटित होता है कि गोंड़ी भाषा का भविष्य पुनर्जीवित हो गया है और इसके सांस्कृतिक खलिहान को सुरक्षित रखने का प्रयास तेजी से हो रहा है।

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