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माचलपुर – हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातम का पर्व मुहर्रम मनाया जाता है।

राजगढ़ माचलपुर से निखिल गोयल की रिपोर्ट 

हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातम का पर्व मुहर्रम मनाया जाता है।

 

हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातम का पर्व मुहर्रम मनाया जाता है।

 

हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में इस्लामी मान्यताओं के मुताबिक कर्बला की लड़ाई में इमाम हुसैन ने इंसानियत को बचाया था इसलिए मोहर्रम को इंसानियत का महीना आज के दिन मुसलमानों का सबसे अहम और पवित्र महीना है आज मोहर्रम की दसवीं तारीख को योम ए आसुरा कहा जाता है असुरा के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग मातम मनाते हैं इसके अलावा आज के दिन ताजिया और जुलूस निकाले जाते हैं ।
बता दें कि मोहर्रम के महीने में पैगंबर मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन कर्बला की जंग में शहीद हुए थे आज से 1400 साल पहले कर्बला की लड़ाई में मोहम्मद के नवासे शहीद हुए थे इमाम हुसैन और उनके 72 साथी शहीद हुए थे लड़ाई इराक के कर्बला में हुई थी लड़ाई में इमाम हुसैन और उनके परिवार के छोटे-छोटे बच्चों को जो की 3 दिन से भूखे प्यासे थे उन्हें शहीद कर दिया था इसलिए मोहर्रम को इंसानियत का महीना माना जाता है इमाम हुसैन की शहादत और कुर्बानी की याद में मुहर्रम मनाया जाता है ।

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