आदिवासियों के पैसों की चोरी करते आरक्षित सीट से चुने गए विधायक :- किसान नेता संजय पंत.
सत्यार्थ न्यूज़ पुनीत मरकाम संवाददाता कांकेर ( छत्तीसगढ़) भानुप्रतापपुर✍️✍️✍️
कांकेर :– आदिवासी कार्यकर्ता एवं किसान नेता संजय पंत ने प्रेस नोट जारी कर दंतेवाड़ा विधायक महोदय के लिए अवैध रूप से तैयार किये गए सरकारी बंगले की तीखी आलोचना करते हुए इसे आदिवासियों के हक एवं अधिकार के पैसे की चोरी बताया है।
किसान नेता आगे कहते हैं कि बाबा साहेब अंबेडकर ने तमाम विरोधों के बावजूद भारतीय संविधान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए लोकसभा और विधानसभा में आरक्षण की व्यवस्था लागू करवाई थी। इस व्यवस्था के पीछे उनकी यह पवित्र सोच थी कि आरक्षित सीटों से चुने हुए जनप्रतिनिधि अपने समाज के लिए मार्गदर्शक का कार्य करेंगे। यह अत्यंत दुख का विषय है कि आरक्षित सीट से चुने गए जनप्रतिनिधि ही अपने समाज से गद्दारी करते हैं और अपने समाज में फैली तमाम समस्याओं एवं पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण बनते हैं।
विधानसभा चुनाव के समय 6 महीने पहले ही आदिवासी हितों की कसमें खाने वाले दंतेवाड़ा के वर्तमान भाजपा विधायक महोदय ने इतनी जल्दी रंग बदला की गिरगिट भी शरमा जाए। बिना किसी सरकारी आदेश या अनुमति के विधायक महोदय के चहेतों द्वारा नगर के हृदय स्थल में बने पुराने सरकारी गेस्ट हाउस को सिर्फ इसलिए तोड़ दिया गया ताकि विधायक महोदय को तोहफे के रूप में सरकारी बंगला दिया जा सके। इन तथाकथित चापलूस चहेतों द्वारा नए भवन के निर्माण के लिए स्वयं द्वारा एक करोड़ रुपए से भी ज्यादा की रकम इस विश्वास के साथ खर्च कर दिए गए की सरकार और तंत्र तो हमारा ही है बाद में निकाल लेंगे। अब सवाल यह उठता है कि सुशासन, अमृतकाल और पारदर्शिता का ढोल पीटने वाले प्रधानमंत्री जी इस पूरे मामले की जांच के लिए ईडी और सीबीआई की टीम भेजेंगे या उन्हें सिर्फ विपक्षी नेताओं की जांच करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
आदिवासी समाज के सामने अनेकों बड़ी समस्याएं मुंह खोले खड़ी हैं जिनकी जड़ों में आदिवासी समाज के जनप्रतिनिधियों की असफलता एवं अज्ञानता छिपी हुई है। विधायक महोदय जी स्वयं आदिवासी समाज से एवं आरक्षित सीट से चुने गए विधायक हैं। बाहर क्षेत्र से आए हुए अपने चहेतों की कठपुतली बनकर उन्होंने जनता के साथ विश्वासघात किया है। इस पूरे घटनाक्रम से यह तथ्य अवश्य समझ आता है कि विधायक महोदय को पांचवी अनुसूची क्षेत्र से निर्वाचित विधायक महोदय को प्राप्त अधिकारों एवं जिम्मेदारियों का ज्ञान होना चाहिए । जनप्रतिनिधियों की इसी अज्ञानता ने बस्तर क्षेत्र को गरीबी, पिछड़ेपन, भ्रष्टाचार, कुपोषण, लाल पानी, हिंसा जैसी विकराल सामाजिक समस्याओं के मुंह में धकेल दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने गूंगे, अंधे एवं बहरे प्रशासनिक तंत्र की भी पोल खोल दी है जिसे यह ही नहीं पता है कि उसका असली मालिक कौन है। बाहरी क्षेत्रों से आए हुए एवं बिना किसी लक्ष्य के राजनीतिक पार्टियों से जुड़कर जनप्रतिनिधियों के चहेते बननेे वाले लोगों को आदिवासियों के कोपभाजन का शिकार बनना पड़ेगा।
भारतीय किसान यूनियन निजी स्वार्थ के लिए सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का जिम्मेदार मानते हुए दंतेवाड़ा विधायक महोदय से तुरंत इस्तीफे की मांग करता है। इस पूरे घटनाक्रम को लिखित में टूटे हुए गेस्ट हाउस के फोटो के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय एवं मुख्यमंत्री कार्यालय भेजा जाएगा। विधायक महोदय एवं जिला प्रशासन द्वारा इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट ना करने की स्थिति में भारतीय किसान यूनियन इस गेस्ट हाउस को किसान भवन के रूप में घोषित करेगा।


















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