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बीकानेर-जीवन भर रहोगे स्वस्थ अगर बचपन से ही करोगे शीर्षासन जानिए योग एक्सपर्ट ओम कालवा के साथ।

न्यूज रिपोर्टर मनोज मूंधड़ा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़

जीवन भर रहोगे स्वस्थ अगर बचपन से ही करोगे शीर्षासन जानिए योग एक्सपर्ट ओम कालवा के साथ।

श्री डूंगरगढ़। कस्बे की ओम योग सेवा संस्था के डायरेक्टर योगाचार्य ओम प्रकाश कालवा ने जानकारी देते हुए बताया कि बचपन से ही शीर्षासन का नियमित रूप से अभ्यास किया जाए तो ता उम्र स्वस्थ रहोगे। इसके बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा। शीर्षासन को शीर्षासन के रूप में भी जाना जाता है, जहां “सिर” का अर्थ है सिर और “आसन” का अर्थ है “आसन” या मुद्रा। यह एक उल्टा या गुरुत्वाकर्षण रोधी आसन है। शीर्षासन को अक्सर “योग मुद्राओं का राजा” कहा जाता है।

विधि

👉शीर्षासन करने के लिए अपनी योगा मैट या ज़मीन पर कंबल या कोई मोटा तौलिया बिछाकर वज्रासन में बैठ जाएं। बाद में इस पर आपको अपना सिर टीकाना है, तो यह आपके सिर को एक नरम पैड देगा। अब आगे की ओर झुककर दोनों हाथों की कोहनियों को जमीन पर टिका दें। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में सख्ती से जोड़ लें।

लाभ

👉शीर्षासन संस्कृत के दो शब्द शीर्ष और आसन से मिलकर बना है, जिसका अर्थ सिर के सहारे योग करना है। इस योग को करते समय व्यक्ति अपने सिर के बल खड़ा होता है। एक मेडिकल रिसर्च के अनुसार, शीर्षासन करने से एकाग्रता बढ़ने के साथ आंखों के रक्त संचार में सुधार भी हो सकता है। जिसका सीधा फायदा आंखों को मिल सकता है। शीर्षासन यह आसन दिमाग को शांत रखता है जिससे बालों का झड़ना (Hair Loss)और गंजापन होने की संभावना कम होती है. यह आसन बालों को सफेद करने और दोबारा बालों को उगाने का काम करता है।

सावधानियां

👉जिस व्यक्ति ब्लड प्रेशर की शिकायत है वह इस आसन को हरगिज ना करें। आंखों से संबंधित कोई बीमारी हो, तब भी इस आसन को नहीं करना चाहिए। गर्दन में कोई समस्या हो तो भी इस आसन को न करें। 40 से ऊपर के लोगों को शीर्षासन करने के लिए मना किया जाता हैं ? शीर्षासन (headstand) एक प्रकार का योगासन है जिसमें शरीर को सिर के ऊपर ले जाते हैं। 40 साल के ऊपर के व्यक्तियों को इस आसन को करने से पहले अपने स्वास्थ्य और कुशलता का खास ध्यान देना चाहिए।

नोट

👉योग का अभ्यास अनुभवी योग शिक्षक की देखरेख में ही करना चाहिए।

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