संवाददाता सुधीर गोखले
सांगली जिले से
मिरज के पुराने घर के खंडहर में मिली ऐतिहासिक कागज और कुछ माधवराव पेशवा काल के दस्त; इतिहास के संशोधक मानसिंगराव कुमठेकर का एक और संशोधन
मिरज तहसील और क्षेत्र ऐतिहासिक जमाने से चर्चा मे रहा है । आदिलशाही इतिहास से लेकर छत्रपती शिवाजी महाराज के पवित्र पाव इस शहर से गुजरे है । मिरज मे एक किला भी रहा है जो जमीन पर बंधा हुवा था। छत्रपती शिवाजी महाराज ने इस किले को जीतने के लिये बहोत मेहनत ली थी लेकिन आखिर तक नहीं जीत पाये थे ऐसा इतिहास मे कुछ कागज के द्वारा जानकारी मिलती है । मिरज के इतिहास संशोधक और तज्ज्ञ मानसिंग राव कुमठेकर जो कि बहोत सालो से सांगली जिले का इतिहास अभ्यास करते आये है । आज मिरज मे एक बड़े पुराने घर जो कि बड़ा अपार्टमेंट करने हेतू गिराया गया उसी पडे हुये घर के खंडहर मे कुछ पुराने कागजात मिलने की खबर लगते ही पोहच गये जो कि खंडहर जैसा पडा हुवा बडा सा घर था पुराने मिरज के पटवर्धन राजा के कार्यकाल मे उनके राज दरबार मे पूजा पाठ करने वाले वाटवे नाम के घराने का … जी हा आज इतिहास अभ्यासक मानसिंगराव कुमठेकर को बडी कामयाबी प्राप्त हुई कुछ ऐसे कागजात मिले जो पेशवा कार्यकाल के सेनापति थोरला माधवराव के शासन के है । इतिहास के संशोधक रहे मानसिंग राव कुमठेकर ने अपना सारा जीवन इतिहास कि खोज मे लगा दिया है उनके मित्र तथा पेशे से फोटोग्राफर रणधीर मोरे इस वाटवे घर पोहोचे तो यह पुराने कागंजाद उन्हे मिले जो कि बारिश मे भिगे पडे थे । इस कागजात को धुंडते मानसिंग को जब १८२० से १८५० साल के पुराने कागद मिले तो वे दंग रह गये । इन कागज मे कुछ इनामी पत्र शामिल है और कुछ पुराने पंचांग और अन्य हस्तलिखित भी है ।


















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