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समस्तीपुर – नेहरू ने डिस्कवरी ऑफ इंडिया में भारत के इतिहास को परंपरा को झुठलाने का काम किया ।

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राजीव कुमार सिन्हा
समस्तीपुर

नेहरू ने डिस्कवरी ऑफ इंडिया में भारत के इतिहास को परंपरा को झुठलाने का काम किया ।

 

समस्तीपुर के दलसिंहसराय स्थित आर बी कालेज में भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली , स्नातकोत्तर इतिहास विभाग, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, एवं इतिहास संकलन समिति उत्तर बिहार एवं आरबी कालेज के स्नाकोत्तर इतिहास विभाग के संयुक्त तत्वाधान में बढ़ती स्व चेतना के मध्य वर्तमान भारतीय इतिहास एवं लेखन विषय पर आज से दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया । इस राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो संजय कुमार चौधरी, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ बालमुकुंद पांडे, मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो श्यामा राय, मगध विश्वविद्यालय बोधगया के कुलपति प्रो. एसपी सिंह, और आरबी कालेज के प्राचार्य सह इतिहास विभाग दरभंगा के विभागाध्यक्ष डा संजय झा ने दीप प्रज्वलित कर किया ।
सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करने पहुंचे अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ बालमुकुंद पांडे ने भारत के इतिहास को लेकर कहा कि भारतीय इतिहास को स्वतंत्रता से पूर्व अंग्रेजो के द्वारा और आजादी के बाद कुछ विचारधारा के द्वारा विनष्ट किया गया है । भारत देव भूमि है जिसका निर्माण देवों ने किया है। लेकिन नेहरू ने डिस्कवरी ऑफ इंडिया में भारत के इतिहास को परंपरा को झुठलाने का काम किया । स्व को जानने की परंपरा की नींव भारतीय मनीषियों ने दी है। स्व का बोध व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को स्वाभिमानी बनाता है। कालांतर में हम विदेशियों, आक्रमणकारियों के कुप्रभाव से धीरे – धीरे स्व चेतना से विमुख होकर उनके द्वारा स्थापित इतिहास के प्रति गलत धारणा को आज भी ढो रहे हैं। आज हम राष्ट्रवादियों के लिए जरूरत है कि हम हर स्तर पर नवीन दृष्टि अपनाते हुए हकीकत की खोज कर नये सिरे से इतिहास लेखन करें। ऐसा करके ही हम नवीन,स्वतंत्र, समृद्ध, विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर पाएंगे।
वंही आरबी कालेज के प्राचार्य सह इतिहास विभाग दरभंगा के विभागाध्यक्ष डॉ संजय झा ने कहा कि भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया है । जिसका विषय बढ़ती स्व चेतना के मध्य वर्तमान भारतीय इतिहास एवं लेखन है । इस सेमिनार में देश भर से 250 से ज्यादा डेलीगेट्स इसमें हिस्सा ले रहे है ।

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