संवाददाता:-
हर्षल रावल सिरोही/राज.
सिरोही में सड़क सुधार प्रस्तावों पर कार्रवाई नहीं होने से जनप्रतिनिधियों में नाराजगी

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सिरोही। जिले में सड़क सुधार प्रस्तावों पर कार्रवाई नहीं होने से जनप्रतिनिधियों में नाराजगी है। PWD पर अनदेखी का आरोप लगा है। बदहाल सड़कों से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
सिरोही जिले में सड़क व्यवस्था को लेकर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी खुलकर सामने आ रही है। बीजेपी के ही जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का मामला अब सुर्खियों में है। जिला परिषद सदस्य दिलीप जैन द्वारा सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़े मुद्दे उठाए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
बताया गया कि 29 अक्टूबर, 2025 को आयोजित जिला परिषद की बैठक में जनहित को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण सड़क सुधार प्रस्ताव रखे गए थे। इन प्रस्तावों को कलेक्टर को बीसीसी (BSE) के माध्यम से संबंधित विभागीय अधिकारियों तक भी भेजा गया, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई कार्य शुरू नहीं हुआ है. अब जैन ने इसकी शिकायत उच्च लेवल पर मंत्री को भी भेज दी है।
बदहाल सड़कों से बढ़ा खतरा:-
क्षेत्र की कई सड़कें लंबे समय से जर्जर अवस्था में हैं। सड़कों की स्थिति अत्यंत खराब बताई जा रही है। यह सड़क गारंटी अवधि (Defect Liability Period) के आस-पास ही टूट गई थी। पांच वर्षों से इसकी मरम्मत नहीं होना निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। इसी प्रकार (NH) तक के मार्ग पर गहरे गड्ढों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
गांव के आंतरिक मार्ग, मंदिर से प्राथमिक बालिका विद्यालय तक की सड़क भी वर्षों से मरम्मत की बाट जोह रही है। स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नियमों की अनदेखी का लगा आरोप:-
राजस्थान रोड डेवलपमेंट पॉलिसी और PWD मैनुअल के तहत सड़क सुरक्षा और नियमित रख-रखाव अनिवार्य है। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि अधिकारियों द्वारा पारित प्रस्तावों की अनदेखी करना सेवा गारंटी अधिनियम की भावना के विपरीत है। जिला परिषद सदस्य दिलीप जैन ने बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों की बात ही नहीं सुनी जाएगी तो आमजन की समस्याओं का समाधान कैसे होगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से तकनीकी जांच करवाकर शीघ्र मरम्मत कार्य शुरू करने की मांग की है।
गुड गवर्नेंस पर उठ रहे प्रश्न:-
इस पूरे मामले ने ‘गुड गवर्नेंस’ के दावों पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जब सत्तारूढ़ दल के जनप्रतिनिधियों को ही सुनवाई के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान कैसे होगा। यह बड़ा प्रश्न बन गया है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि लापरवाह अधिकारियों से स्पष्टीकरण लिया जाए और प्रस्ताव पारित होने के बाद भी कार्य लंबित रखने के कारणों को सार्वजनिक किया जाए। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले में कब तक ठोस कार्रवाई करते हैं।

















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