ग्राम पंचायत बुटबेडवा में बड़ा आवास घोटाला, झारखंड की अपात्र महिला को फर्जी तरीके से मिला सरकारी आवास, जांच की मांग
(दुद्धी सोनभद्र रिपोर्ट: नितेश कुमार)
सोनभद्र।जनपद सोनभद्र के दुद्धी तहसील अंतर्गत विण्ढमगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत बुटबेडवा में सरकारी आवास योजना के अंतर्गत एक गंभीर अनियमितता का मामला प्रकाश में आया है। आरोप है कि झारखंड राज्य की निवासी एक महिला को साजिश के तहत उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायत में सरकारी आवास का लाभ दे दिया गया, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है और कई पात्र ग्रामीण इस योजना से वंचित रह गए हैं।जानकारी के अनुसार सीमा देवी पत्नी दिनेश पासवान, ग्राम खजुरी, पंचायत चिरंजिया, ब्लॉक गढ़वा, जिला गढ़वा (झारखंड) की निवासी हैं। सीमा देवी के नाम झारखंड सरकार द्वारा जारी राशन कार्ड संख्या 2200406454037 दर्ज है। इतना ही नहीं, झारखंड सरकार की अबुआ आवास योजना के अंतर्गत उन्हें पहले ही आवास का लाभ मिल चुका है। इसके बावजूद आरोप है कि सीमा देवी को पुनः ग्राम पंचायत बुटबेडवा, विण्ढमगंज ब्लॉक, दुद्धी तहसील, जिला सोनभद्र में फर्जी तरीके से सरकारी आवास आवंटित कर धन स्वीकृत करा दिया गया।
मामले में आरोप है कि आवास सर्वे के दौरान ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव (सेक्रेटरी) एवं अजय श्रीवास्तव, ए.डी.ओ. आवास की मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा किया गया। नियमों को ताक पर रखकर एक अपात्र झारखंड निवासी को उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायत में सरकारी योजना का लाभ दिलाया गया, जबकि नियमानुसार लाभार्थी का उसी ग्राम पंचायत का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि उक्त सरकारी आवास का निर्माण सिंचाई विभाग की बंधी भूमि पर कराया जा रहा है, जो पूरी तरह अवैध है। इस प्रकार न केवल आवास आवंटन में नियमों का उल्लंघन हुआ है, बल्कि सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण कराकर कानून की अवहेलना भी की गई है।ग्रामीणों का कहना है कि एक ही व्यक्ति को दोहरा लाभ दिलाने का प्रयास किया गया है, जबकि ग्राम बुटबेडवा में कई ऐसे पात्र परिवार हैं जो वर्षों से सरकारी आवास की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस कथित घोटाले के कारण वास्तविक जरूरतमंद लाभार्थी योजना से वंचित रह गए हैं, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले को सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर प्रकरण बताते हुए उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और लाभार्थी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई, अवैध रूप से स्वीकृत धन की रिकवरी तथा फर्जी आवास आवंटन को निरस्त करने की मांग की गई है।अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हुए जांच कराता है और दोषियों पर क्या ठोस कार्रवाई की जाती है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो और वास्तविक पात्रों को योजनाओं का लाभ मिल सके।

















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