जानगढ़: एक अनजान गांव की दास्तान
गुना जिले से संवाददाता बलवीर योगी

जानगढ़ एक ऐसा गांव है जो ओछापुरा से पूर्व की ओर लगभग 20 किमी दूर कूनो नदी के तट पर स्थित है। यह गांव घने जंगल और ऊंचे पहाड़ों के बीच बसा है, जो मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के पाताल कोट की तरह ही है। जानगढ़ की प्राकृतिक सौंदर्यता अद्वितीय है, जिसमें कल-कल बहते पानी के झरने, कूनो नदी के तेज बहाव की निराली छटा, और वन्य प्राणियों की घनघोर आवाजें शामिल हैं।
जानगढ़ के निवासियों की समस्याएं
जानगढ़ के निवासी आदिवासी भाई हैं, जो सदियों से इस गांव में रहते आए हैं। लेकिन उनकी जिंदगी बहुत ही कठिन है। गर्भवती महिलाओं को और बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को बहुत कष्ट और पीड़ा झेलने को मजबूर हैं। गांव में न कोई कर्मचारी, न कोई सरकार का प्रतिनिधि, मंत्री, विधायक, सांसद, और अधिकारी नहीं जाते हैं।
सरकार की योजनाओं का अभाव
जानगढ़ में न कोई सड़क है, न पेयजल के लिए बोर, और आवास भी नहीं मिले हैं। सैकड़ों पीढ़ियां खपा हो चुकी हैं, जो सदियों से जानगढ़ की मिट्टी में पले बढ़े थे, आज वह मजबूर और लाचार हैं। उनकी समस्याएं सुनने को कोई तैयार नहीं है।
विस्थापन की समस्या
अब जानगढ़ के निवासियों को कूनो पार्क और सरकार के अफसर विस्थापित करने जा रहे हैं। विधायक मुकेश मल्होत्रा ने सरकार से और वन विभाग के जिम्मेदार लोगों से आग्रह किया है कि जानगढ़ के निवासियों को उनकी मनपसंद जगह पर विस्थापित किया जाए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए।
मांगें
विधायक मुकेश मल्होत्रा ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
– जानगढ़ के प्रत्येक सदस्य जो 18 वर्ष पूर्ण कर चुके हैं, उन्हें 9-9 बीघा जमीन और 25-25 लाख मुआवजा राशि स्वीकृत की जाए।
– जहां बसाना चाहते हैं, वहां स्कूल, हॉस्पिटल, आंगनवाड़ी भवन, सीसी रोड, पेयजल की सुविधा आदि मूलभूत सुविधाओं का खाका तैयार किया जाए।
– जब तक इनका विधिवत विस्थापित नहीं हो जाता है, तब तक उनको उस भूमि में खेती करने से न रोका जाए।

















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