बरेली से यूसुफ खान की रिपोर्ट
मुस्लिम समुदाय मे आज मनाया जाएगा चेहल्लुम का त्यौहार
चेहल्लुम का त्यौहार सब्र, सहनशीलता, न्याय और समानता जैसे इस्लामी मूल्यों को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है. इसलिए इस दिन इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की शहादत को याद किया जाता हैं.
इस्लाम धर्म का प्रमुख त्योहार चेहल्लुम शहीद-ए-कर्बला की याद में हर साल मनाया जाता है. मुस्लिम समाज में चेहल्लुम को अरबीन भी कहा जाता है. इस्लाम में मान्यता है कि दसवीं मुहर्रम को इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की शहादत के 40वें दिन मनाया जाता है. इमाम हुसैन, हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम के नवासे थे और उन्होंने यजीद की बुराईयों के खिलाफ जंग लड़ी थी.
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, चेहल्लुम का त्योहार 26 अगस्त को मनाया जाएगा. ईरान और ईराक में 20 सफर की तारीख 25 है इसलिए यहां चेहल्लुम 25 अगस्त को मनाया जाएगा और भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और दुनिया के कुछ अन्य हिस्सों में 26 अगस्त को चेहल्लुम का त्योहार मनाया जाएगा. मुस्लिम समुदाय के लोग चेहल्लुम को शहादत के रूप में हर साल मनाते हैं.
चेहल्लुम कुर्बानी और सर्ब का भी प्रतीक है
मान्यता है कि चेहल्लुम केवल गम का त्यौहार ही नहीं है, बल्कि यह बहादुरी, कुर्बानी और शाहदत् का भी प्रतीक है. यह त्यौहार मुसलमानों को इमाम हुसैन के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरणा लेने और एक बेहतर इंसान बनने का संदेश देता है. यह त्यौहार इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद करने का अवसर है, जिन्होंने न्याय, समानता और सच के लिए अपनी कुर्बनीया दी है. यह त्यौहार त्याग और बलिदान की भावना को याद करने का भी समय है.
इस दिन जलसे भी आयोजित किये जाते है
चेहल्लुम का त्यौहार सब्र, सहनशीलता, न्याय और समानता जैसे इस्लामी मूल्यों को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है. इसलिए इस दिन गमज़दा माहौल मे जलसे भी आयोजित किये जाते हैं, जिनमें इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की शहादत के बारे में हदीसो के बयान पढ़े जाते हैं. जगह- जगह लोग जुलूस निकाले जाते हैं, जिनमें शियाँ समुदाय के लोग सीनाजोई करते हैं, मातम करते हैं और कर्बला को याद करते हैं. इसके अलावा गरीबों और जरूरतमंदों को खाना खिलाना और अन्य सहायता देना प्रमुख है.
















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