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कांकेर क्षेत्र की गोंडी बोली के संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु

      सत्यार्थ न्यूज़ से संवाददाता पुनीत मरकाम कांकेर छत्तीसगढ़ भानुप्रतापपुर ✍️                                                   कांकेर क्षेत्र की गोंडी बोली के संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु 

                                                                                                   कांकेर। संचालनालय, आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, सेक्टर-24 नवा रायपुर अटल नगर (छ.ग.) (TRTI) की महत्वपूर्ण पहल में भारत देश के जनजातीय मानचित्र में गोंड जनजाति का उनमें व्याप्त विशिष्ट संस्कृति एवं जनसंख्यात्मक बहुलता की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है। छत्तीसगढ़ राज्य की आदिवासी जनसंख्या में गोंड जनजाति की जनसंख्या लगभग 55 प्रतिशत है। गोंड समुदाय की अपनी स्वयं की गोंडी बोली है जो पृथक-पृथक क्षेत्रों में विभिन्न स्वरूपों में बोली जाती है। शिक्षा एवं अधोसंरचनात्म्क विकास के साथ-साथ जनजातीय समुदायों की बोली के संरक्षण संवर्द्ध के साथ-साथ इन भाषाओं/ बोलियों को देश ही नहीं वरन वैश्विक रूप में भी प्रचारित एवं प्रसारित करने की दिशा में कार्य किया जाना एक महत्वपूर्ण कार्य होगा। जनजातीय समुदायों के संस्कृति संरक्षण एवं संवर्द्धन की दिशा में छत्तीसगढ़ आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) द्वारा राज्य की गोंडी बोली के संरक्षण-संवर्द्धन एवं प्रचार-प्रसार का बीड़ा संस्थान के संचालक श्री पदुम सिंह एल्मा, आई.ए. एस. के नेतृत्व में उठाया गया है। संस्थान द्वारा भारत सरकार, जनजातीय कार्य मंत्रालय की मंशानुरूप हिन्दी-गोंडी-अंग्रेजी तीन भाषाओं पर आई.आई.आई.टी. (IIIT) नवा रायपुर के तकनीकी सहयोग से आर्टिफिशियल इन्टैलिजेंस (AI) एप विकसित किये जाने हेतु कांकेर क्षेत्र के गोंडी बोली के जानकार एवं विशेषज्ञों के सहयोग से कार्य किया जा रहा है। 3 – 4 चरणों में कांकेर क्षेत्र के गोंडी विशेषज्ञों की 5 – 5 दिवसीय कार्यशाला आयोजित कर भिन्न-भिन्न विषयक हिन्दी वाक्यों, पूर्व के स्वतंत्रता दिवसों पर माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं पूर्व के गणतंत्र दिवसों पर महामहिम राष्ट्रपति महोदय के हिन्दी उद्बोधनों / संदेशों का गोंडी में अनुवाद कार्य सह ऑडियो रिकॉर्डिंग का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य में गोंड समुदाय के मुकेश कुमार उसेण्डी, श्रीमती मनोत्री ध्रुवा, बलीराम उसेण्डी एवं जोहार लाल उइके द्वारा सहभागिता दी गई है। इनके द्वारा संस्थान में की गई आवश्यक व्यवस्थाओं एवं कार्यालयीन स्टाफ की भूरि-भूरि प्रशंसा व्यक्त करते हुए भविष्य में इस प्रकार के संस्कृति संरक्षण एवं संवर्द्धन जैसे कार्यों में अपनी सहभागिता की ईच्छा व्यक्त की। आदिमजाति अनुसंधान संस्थान (TRTI) के संचालक पदमु सिंह एल्मा, श्रीमती गायत्री नेताम, संयुक्त संचालक, अनुवाद कार्य के प्रभारी दल डॉ. अनिल विरूलकर, सहायक अनुसंधान अधिकारी, अमर दास, निर्मल बघेल एवं आनंद सिंह परमार अनुसंधान सहायक, योगेन्द्र निषाद, स्टेनोग्राफर तथा जितेन्द्र साहू का इस पहल में विशेष योगदान रहा है।

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