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परबतसर – भगवान की कृपा होने पर ही भागवत कथा सुनने का अवसर मिलता है : कथा व्यास सुनिल महाराज ।

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न्यूज़ रिपोर्टर का नाम :- श्याम सुन्दर शर्मा

परबतसर

भगवान की कृपा होने पर ही भागवत कथा सुनने का अवसर मिलता है : कथा व्यास सुनिल महाराज ।

शहर के बड़ले वाले बालाजी मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में राधे-राधे श्री राधे के नाम से पूरा पंडाल गुंजायमान हो उठा। पंडित पवन कुमार शास्त्री ने बताया कि कथा श्रवण के लिए काफ़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से मानव का जीवन सफल होता है। मानव को अपने जीवन में सरलता लानी चाहिए। यदि मानव के जीवन में सरलता होगी, तभी वह आगे बढ़ सकेगा। द्वितीय दिवस की कथा में कथा व्यास सुनिल महाराज ने परीक्षित जन्म कथा सविस्तार से सुनाई। उन्होंने बताया कि पांडवों के पुत्र अर्जुन, अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु, अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा, जो राजा विराट की पुत्री थी। वह अभिमन्यु को ब्याही गई थी। युद्ध में गुरु द्रोण के मारे जाने से क्रोधित होकर उनके पुत्र अश्वत्थामा ने क्रोधित होकर पांच पांडवों को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया, लेकिन वे पांडव ना होकर द्रोपदी के पांच पुत्र थे। जानबूझकर चलाए गए इस अस्त्र से उन्होंने उत्तरा को अपना निशाना बनाया। अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा उस समय गर्भवती थी। बाण लगने से उत्तरा का गर्भपात हुआ और गर्भपात होने से परीक्षित का जन्म हुआ। इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए भोले बाबा द्वारा मां पार्वती को अमर कथा व भगवान शिव चरित्र की कथा का वर्णन किया । इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने भागवत कथा के प्रसंग व भजन पर भक्ति में लीन होकर जमकर तालियां बजायीं और खूब झूमे ।

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