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मथुरा : 108 कलश यात्रा के साथ हुआ केएम में मद्भागवत कथा का शुभारंभ।

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रिपोर्ट गोपाल चतुर्वेदी/मथुरा, उत्तर प्रदेश 

 

108 कलश यात्रा के साथ हुआ केएम में मद्भागवत कथा का शुभारंभ।

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• ब्रज के कण-कण में मेरौ गोविन्द वास करता है, ब्रज की रज से मुक्ति की भी हो गई थी मुक्ति : श्रीकृष्ण चन्द्र ठाकुरजी महाराज 

• सत्य, प्रकाश और आनंद में होते है ठाकुरजी महाराज : श्रीकृष्ण चन्द्र ठाकुरजी महाराज 

• कलश यात्रा के दौरान भक्ति में भावविभोर होकर नाची छात्राएं और महिलाएं ।

• भागवत कथा के श्रवण से जीवन में भक्ति,ज्ञान,वैराग्य, के बंधनों से छुटकारा मिलता है : श्रीकृष्ण चन्द्र ठाकुरजी महाराज 

 

मथुरा। भागवत महापुराण के श्रवण से मनुष्य को जीवन में भक्ति,ज्ञान ,वैराग्य के बंधनों से छुटकारा मिलता है। श्रीमद् भागवत कथा साक्षात भगवान की वाणी है। इस ब्रज के कण कण में मेरे गोविन्द का वास है, उन्होंने कहा एक बार मुक्ति ने भगवान से कहा कि हम सबकी मुक्ति करते है हमारी मुक्ति कौन करेगा, तो ठाकुरजी ने कहा मुक्ति आप ब्रज की रज को सिर पर लगा ले ते आपकी मुक्ति हो जाएगी। यह बात आज श्रीकृष्ण चन्द्र शास्त्री महाराज ने केएम विश्वविद्यालय में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिन के दौरान कही।

गौरतलब हो कि जिला पंचायत अध्यक्ष एवं केएम विवि के कुलाधिपति किशन चौधरी अपने पिता मोहन सिंह के चौथे नम्बर के पुत्र है, उनके पिता के आत्म कल्याण हेतु यह भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। इस श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ में मोहन सिंह चौधरी के आत्म कल्याण हेतु उनके पांचों पुत्रों का परिवार मौजूद रहा।

गिरिराज जी महाराज की अनुकृपा से सौंख रोड पाली डूंगरा स्थित केएम विवि के खेल मैदान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा से पूर्व विशाल कलश यात्रा निकाली गई। प्रात दस बजे कलश यात्रा की शुरूआत विवि के मंदिर प्रांगण से हुई। बैंड बाजा के साथ पीत वस्त्र में 108 महिलाएं, एमबीबीएस की छात्राएं, महिला डाक्टर्स कलशों को सिर पर धारण करके विवि के परिसर में भ्रमण करते हुए श्रीमद भागवत पुराण स्थल पहुंची जहां बैंड बाजों की धुन पर जमकर युवतियां, महिलाएं नाची तथा कलशों को भागवत स्थल पर स्थापित किया गया। इस दौरान कलश यात्रा की अगुवानी विवि के कुलाधिपति किशन चौधरी एवं उनकी पत्नी श्रीमती संजू चौधरी ने की तथा भागवत को सिर पर केएम के प्रशासनिक अधिकारी देवी सिंह चौधरी (डीएम)धारण किया। दोपहर दो बजे व्यासपीठ एवं श्रीमद् भागवत पुराण की पूजा अर्चना एवं आरती कुलाधिपति के परिवार ने संयुक्त रूप से की। मुख्य अतिथि के रूप में पधारे परमपूज्य महामंडलेश्वर गीता मनीषी श्रीस्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कार्यक्रम के प्रथमसत्र का शुभारंभ दीप प्रज्जवलित करके किया। उनके साथ इस दौरान रामकथा प्रवक्ता अतुल कृष्ण भारद्वाज, बलदेव के पार्षद आरके पांडेय मौजूद रहे। कथावाचक श्रीकृष्ण चन्द्र शास्त्री महाराज ने अपनी मृदुल वाणी से कथा का शुभारंभ करने से पूर्व अक्षय तृतीया एवं परशुराम के जन्मदिन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नारी का सम्मान जहां होता है वहां देवता उस स्थान को नमन करते है, वहीं नारी का अपमान होता है वहां आपकी सारी क्रियाएं विफल हो जाती है। मानव धर्म और मानव की रक्षा का दिन ही अक्षय तृतीया है। उन्होंने ब्रज की चार रानियों के बारे में बताते हुए कहा कि पहली ब्रजरज रानी है, दूसरी यमुना रानी, तीसरी भक्ति रानी, चौथी जगत जननी श्रीराधारानी है, जो पूरे ब्रज की राधारानी कहलाती है। उन्होंने परमात्मा के तीन नाम बताये पहला सत्य, दूसरा प्रकाश, तीसरा आनंद है।

इस अवसर पर आचार्य दुर्ग प्रसाद, बालकृष्ण शास्त्री, कुलाधिपति के भाई देवी सिंह उर्फ डीएम, कालीचरण चौधरी, कर्मसिंह चौधरी, धूप सिंह चौधरी, इसके अलावा कुलाधिपति की पत्नी संजू चौधरी की बहिन मंजू तौमर, पिंकी तौमर एवं उनके परिवार के नीतेश चौधरी उर्फ बबलू तथा उनकी पत्नी तथा विवि के कुलाधिपति के सुपुत्र पार्थ चौधरी एवं समस्त चौधरी परिवार सहित विश्वविद्यालय और हॉस्पिटल,मेडीकल कालेज के प्रशासनिक अधिकारी एवं स्टाफ मौजूद रहा।

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