तन एवं मन से अध्यात्म एवं समाज की सेवा करते रहे और मृत्यु के बाद भी स्वयं मन से निर्णीत, निर्जीव तन से भी सेवा, मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर के लिए मृत शरीर दान किया।
गायत्री उपासक राजाराम पवार की की देह मेडिकल कॉलेज को वसीयत अनुसार सौंपी गई

वर्तमान जगत में जहां दुनिया के लोग भौतिक चकाचौंध एवं पैसे के पीछे भाग रहे हैं। वही दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जो जीते जी अध्यात्म एवं समाज की सेवा करते रहे और मरने के बाद भी अपना शरीर मेडिकल कॉलेज के लिए दान कर गए।
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अखिल भारतीय स्वर्णकार महासभा एवं गायत्री परिवार आंदोलन समिति के पदाधिकारी लायन अरुण कुमार सोनी ने बताया कि गायत्री उपासक राजा राम पवार जी ने अपनी वसीयत खुद लिखी थी और कहा था कि मेरे मरने के उपरांत मेरे मृत शरीर को मेडिकल कॉलेज के लिए दान कर देना। परिजन ने मेडिकल कॉलेज के सुपुर्द किया। शहर की आज्ञाराम कॉलोनी निवासी राजाराम पवार (66) ने 16 जुलाई 2019 को सपत्नीक अपने हाथों से देहदान के लिए वसीयत लिखी थी।
उनके निधन के बाद रविवार को समाजसेवी और देहदानी विकास पचौरी के माध्यम से मेडिकल कॉलेज को उनकी देह का दान कर दिया गया। इससे पहले निवास पर ही उनके सम्मान में गार्ड ऑफ ऑनर देने के साथ ही राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा अर्पित किया गया। मेडिकल कॉलेज के एनॉटॉमी विभाग में यह 36वां देहदान था। शव को अंतिम यात्रा की तरह ही मेडिकल कॉलेज ले जाया गया।

वहां कॉलेज में सुरक्षा स्टाफ द्वारा श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान एनॉटॉमी विभाग के साथ ही मेडिकल कॉलेज का स्टाफ मौजूद रहा। वहां शोकसभा भी रखी गई। इस दौरान चिकित्सा विभाग के अधीक्षक डॉ. अविनाश लाघवे, एनॉटॉमी विभाग के सभी चिकित्सक सहित देहदान के लिए शहर में अभियान चलाने वाले विकास पचौरी मौजूद रहे। इस अवसर पूरी कार्यवाही में लगातार उनके साथ गायत्री परिव्राजक मुकेश तिवारी, मुकेश श्रीवास्तव, श्री राम कटियार, थान सिंह कुशवाह, उनकी धर्मपत्नी शोभा पवार, शहीद कई परिवृजाक महिला पुरुष, जिला शिक्षा अधिकारी एसपी सिंह,उत्कृष्ट प्राचार्य के सिंह , पूर्व प्राचार्य वीरेंद्र जैन, पूर्व बीआरसी आर के ठाकुर, सहित शहर के कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

















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