बाबा के चरणों की ओर… पांढुर्ना से शिरडी तक आस्था की दिव्य यात्रा, साईं भिक्षा झोली पालकी में उमड़ा श्रद्धा का महासागर
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

पांढुरना – जब हृदय में श्रद्धा हो, पग-पग में विश्वास हो और लक्ष्य केवल बाबा के चरण हों, तब मार्ग स्वयं पवित्र हो जाता है। ऐसे ही भावों के साथ पांढुर्ना की पुण्य धरा साईं टेकड़ी से भगवान श्री साईं बाबा की पावन भिक्षा झोली पालकी पदयात्रा का शुभारंभ हुआ। यह कोई साधारण यात्रा नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने वाली साधना है, जिसे श्री सद्गुरु साईं भिक्षा झोली पालखी एवं पदयात्रा समिति पिछले 16 वर्षों से अनवरत निभा रही है।
यह दिव्य पदयात्रा 1 जनवरी 2026 को बाबा के नाम का संकल्प लेकर साईं मंदिर , साईं टेकडी से प्रारंभ हुई, जो लगभग 21 जनवरी 2026 तक चलेगी। इन 21 दिनों में साईं भक्त लगभग 650 किलोमीटर की पदयात्रा कर शिरडी पहुँचेंगे। यह यात्रा शरीर से अधिक मन, विवेक और विश्वास की यात्रा है, जहाँ हर कदम बाबा की कृपा से आगे बढ़ता है।

द्वितीय दिवस: जब नगर साईंमय हो उठा
2 जनवरी 2026, पदयात्रा के द्वितीय दिवस, पांढुर्ना नगर साईंमय हो उठा। गणेश वार्ड स्थित साईं कुटिया से निकली पालकी के साथ लगभग 100 साईं साधकों का जत्था “जय साईं राम” और “सबका मालिक एक” के मधुर जयघोष के साथ आगे बढ़ा। भगवा ध्वज, धूप-दीप, ढोल-मृदंग और भक्तिरस ने वातावरण को अलौकिक बना दिया।
पालकी का पावन मार्गदर्शन
श्री रोशन जी तहकीत – अध्यक्ष, साईं भिक्षा झोली पदयात्रा
श्री उज्जवल सिंह जी चौहान – अध्यक्ष, साईं मंदिर टेकड़ी संस्थान
एवं असंख्य श्रद्धालु बाबा की कृपा में सहभागी बने।
नगर के पवित्र पड़ावों पर दर्शन-वंदन
पालकी गुजरी चौक, शारदा मार्केट, जय श्री दादाजी दरबार, शांति निकेतन जैसे प्रमुख स्थानों से होकर गुजरी। प्रत्येक स्थल पर श्रद्धालुओं ने नतमस्तक होकर बाबा से सुख, शांति, सद्बुद्धि और करुणा की कामना की। पुष्पांजलि, आरती और अश्रुपूरित नेत्रों से भक्तों ने बाबा को हृदय से प्रणाम किया।
इसके पश्चात पालकी शनि मंदिर पहुँची, जहाँ श्री तुकाराम जी बालपांडे के खेत में स्थित साईं मंदिर में विशेष पूजन हुआ। वहाँ बाबा की भिक्षा झोली को ससम्मान विराजमान कर भक्तों ने सेवा का सौभाग्य प्राप्त किया।

महाप्रसाद: कृपा का प्रसाद
पालकी स्वागत के पश्चात आयोजित महाप्रसाद में श्रद्धालुओं ने बाबा की कृपा को प्रसाद रूप में ग्रहण किया। सेवा में कोई भेद नहीं—यही बाबा की सीख है—और इस भाव ने समूचे आयोजन को आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की।
महाप्रसाद पश्चात पालकी अपने अगले दिव्य पड़ाव की ओर बढ़ी और श्री देवी माता संस्थान, पिपलागढ़ स्थित माँ पिपलेश्वरी मंदिर के लिए प्रस्थान किया।
भिक्षा झोली पदयात्रा: जीवन का संदेश
यह भिक्षा झोली पदयात्रा केवल शिरडी पहुँचने का मार्ग नहीं, बल्कि अहंकार त्याग, सेवा भाव, संयम और करुणा का जीवन-पाठ है। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा निःस्वार्थ सेवा, जलदान, अन्नदान और विश्राम की व्यवस्था बाबा के वाक्य—
“श्रद्धा और सबूरी”
को साकार करती है।
पूरा क्षेत्र बाबा की भक्ति में डूबा हुआ है और हर दिशा से एक ही स्वर गूंज रहा है—
“सबका मालिक एक… जय साईं राम।”


















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