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एमपी विधानसभा का रिपोर्ट कार्ड: दो साल में 50 विधायक मौन, जनता की आवाज हुई गायब – कौन जिम्मेदार?

एमपी विधानसभा का रिपोर्ट कार्ड: दो साल में 50 विधायक मौन, जनता की आवाज हुई गायब – कौन जिम्मेदार?

हरि शंकर पराशर, भोपाल


मध्य प्रदेश की 16वीं विधानसभा को बने दो साल हो चुके हैं। सात सत्र बीत गए, हजारों सवाल पूछे गए, लेकिन एक कड़वा सच सामने आया है – हर सत्र में औसतन 50 विधायक पूरी तरह चुप रहे! मंत्रियों और स्पीकर को छोड़कर 198 विधायकों में से करीब 25% ने अपने क्षेत्र की जलती समस्याएं – खराब सड़कें, बंद स्कूल, पानी की किल्लत, बेरोजगारी – विधानसभा में उठाने से परहेज किया।
यह आंकड़े कोई अफवाह नहीं, बल्कि विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड पर आधारित हैं। बजट सत्रों (जुलाई 2024 और जुलाई 2025) में सबसे ज्यादा सवाल पूछे गए – 4000 से ऊपर – लेकिन छोटे सत्रों में चुप्पी का ग्राफ चढ़ता गया। दिसंबर 2025 के शीतकालीन सत्र में तो 55 विधायक एक भी सवाल नहीं पूछ सके। पार्टी-वार देखें तो भाजपा के विधायकों की चुप्पी सबसे ज्यादा – हर सत्र में 28 से 57 तक मौन! कांग्रेस के 5 से 12 विधायक भी पीछे नहीं।
पूर्व मुख्य सचिव भगवानदेव इसराणी ने इस पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा, “विधानसभा जनता का सबसे बड़ा मंच है। यहां अगर आवाज नहीं उठेगी, तो लोकतंत्र का भरोसा कैसे कायम रहेगा? सरकार छोटे-छोटे सत्र रखकर और गिलोटिन लगाकर बहस को कुचल रही है। नतीजा यह कि जनता के मुद्दे फाइलों में दफन हो जा रहे हैं।”
लेकिन सवाल सिर्फ विधायकों से नहीं, आपसे भी है!
आखिर इन नुमाइंदों को सदन में भेजा किसने? आपने ही तो वोट देकर चुना! पार्टी के बड़े नेता टिकट बांटते हैं, और जीतने के बाद ये विधायक पार्टी की लाइन पर चलते हैं – जनता की नहीं। स्वतंत्र सोच वाले, क्षेत्र की लड़ाई लड़ने वाले उम्मीदवारों को मौका मिलता ही कहां? जनता की सबसे बड़ी गलती यही है कि वह बार-बार ऐसे बंदे चुनती है, जो चुनाव के बाद पार्टी के गुलाम बन जाते हैं और अपनी आवाज तक खो देते हैं।
अगले चुनाव में सोचिएगा – क्या ऐसे मौन विधायकों को फिर टिकट देकर अपनी ही आवाज कुचलवानी है? सवाल पूछना विधायक का सबसे बड़ा हथियार है, चुप रहना जनता के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात। यह लोकतंत्र का आईना है – और आईने में चेहरा आपका भी दिख रहा है। अब वक्त है बदलाव का। ऐसे नुमाइंदों को सबक सिखाने का। जनता जागे, लोकतंत्र बचे!
(आधार: मध्य प्रदेश विधानसभा रिकॉर्ड एवं विश्लेषण)

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