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अमित खम्परिया की गिरफ्तारी: जबलपुर के कुख्यात ठग की नागपुर से सलाखों के पीछे पहुंची साजिशें

अमित खम्परिया की गिरफ्तारी: जबलपुर के कुख्यात ठग की नागपुर से सलाखों के पीछे पहुंची साजिशें

जबलपुर, 7 दिसंबर 2025: मध्य प्रदेश के जबलपुर की क्राइम ब्रांच ने एक लंबी फरारी के बाद कुख्यात ठग अमित खम्परिया (जिसे अमित खमरिया के नाम से भी जाना जाता है) को महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी पुलिस के लिए मील का पत्थर साबित हुई है, क्योंकि अमित पर जबलपुर, मंडला, उमरिया सहित आसपास के जिलों में 18 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें करोड़ों रुपये की ठगी, फर्जीवाड़ा, खनन माफिया से जुड़े अवैध कार्य, हत्या के प्रयास और न्यायालय की अवमानना जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। उसके सिर पर 1.40 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जो अब रद्द हो चुका है। हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद दबाव में आई पुलिस ने नागपुर में कई छापेमारियां कीं, जहां अमित फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपनी साजिशें जारी रखे हुए था।
पृष्ठभूमि: एक ठग की अपराधी यात्रा
अमित खम्परिया जबलपुर का मूल निवासी है, जो वर्षों से फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रिसीप्ट (एफडीआर) स्कीम के जरिए निवेशकों को लूटता रहा। उसकी ठगी की चालाकी ऐसी थी कि वह फर्जी बैंक दस्तावेज बनाकर लोगों को भरोसा दिलाता, करोड़ों रुपये ऐंठ लेता और फिर गायब हो जाता। लेकिन उसके अपराध सिर्फ आर्थिक लूट तक सीमित नहीं थे। अमित ने अपने पिता अनिरुद्ध प्रताप चतुर्वेदी को बचाने के लिए निर्दोष व्यक्ति को जेल भिजवाने जैसे घिनौने कृत्य किए। 2011 में मंडला जिले के कान्हा टाइगर रिजर्व के पास स्थित राज्य राजमार्ग टोल कॉन्ट्रैक्ट के दौरान, अमित और उसके पिता ने सरकारी दर से अधिक टोल वसूली की और रसीदों में हेराफेरी की। जब कोर्ट ने उसके बुजुर्ग पिता को 5 वर्ष की सजा सुनाई, तो अमित ने कमल पांडे नामक एक निर्दोष व्यक्ति को प्रॉक्सी (प्रतिनिधि) के रूप में जेल भिजवा दिया। पांडे को पैसे देकर यह काम करवाया गया, जबकि असली दोषी बाहर घूमते रहे। यह मामला 2021 में तब सामने आया जब पांडे ने जबलपुर एसपी को शिकायत दर्ज कराई। इसी तरह, दो अन्य व्यक्ति शम सुंदर खम्परिया और विराट तिवारी को अमित और दशरथ तिवारी के नाम से जेल भेजा गया।
अमित की फरारी सितंबर 2023 से शुरू हुई, जब हाईकोर्ट ने उसकी गिरफ्तारी में पुलिस की लापरवाही पर सख्ती दिखाई। वह खनन माफिया के रूप में भी सक्रिय था, अवैध खनन के जरिए काला धन कमाता रहा। पुलिस के अनुसार, फरार होने के दौरान भी वह नागपुर में फर्जी योजनाओं के जरिए साजिशें रच रहा था। हमेशा उसके साथ सशस्त्र बाउंसर और बंदूकधारी घूमते थे, जो उसकी सुरक्षा का खास इंतजाम था।


गिरफ्तारी का विवरण: हाईकोर्ट की फटकार बनी अंतिम धक्का
हाईकोर्ट ने सितंबर 2024 में जबलपुर एसपी को शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया था, जिसमें अमित की गिरफ्तारी के प्रयासों और उसकी संपत्ति जब्ती की प्रगति का ब्योरा मांगा गया। इस दबाव के बाद क्राइम ब्रांच ने नागपुर में गुप्त सूत्रों के आधार पर छापेमारी शुरू की। 5 दिसंबर 2025 को अमित को नागपुर के एक गुप्त ठिकाने से धर दबोचा गया। उसके पास से फर्जी दस्तावेज, बैंक खाते और मोबाइल डिवाइस बरामद हुए, जो उसकी चल रही ठगी की साजिशों का सबूत हैं। पुलिस ने बताया कि अमित ने फरार रहते हुए भी मंडला और उमरिया में खनन से जुड़े अवैध सौदे किए थे। गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर जबलपुर लाया गया, जहां अदालत में पेश किया गया।
अमित खम्परिया का अपराधी इतिहास: विभिन्न स्थानों पर फैली ठगी का जाल
अमित के अपराध सिर्फ जबलपुर तक सीमित नहीं थे। उसके खिलाफ दर्ज मामलों की सूची लंबी है, जो मध्य प्रदेश के कई जिलों में फैली हुई है।
नीचे मुख्य अपराधों का विवरण दिया गया है:
जिला/स्थान
मुख्य अपराध
विवरण
अनुमानित क्षति/प्रभाव
जबलपुर
फर्जी एफडीआर स्कीम और ठगी
फर्जी बैंक दस्तावेज बनाकर निवेशकों से करोड़ों रुपये ऐंठे। एक मामले में अपने पिता को बचाने के लिए निर्दोष कमल पांडे को जेल भिजवाया।
5+ मामले, 50 लाख+ रुपये की ठगी; कई परिवार बर्बाद।
मंडला
अवैध टोल वसूली और प्रॉक्सी जेल
2011 में कान्हा टाइगर रिजर्व के पास टोल कॉन्ट्रैक्ट में हेराफेरी। पिता की सजा का बोझ निर्दोषों पर डाला।
3 मामले, सरकारी राजस्व को 20 लाख+ का नुकसान।
उमरिया
खनन माफिया और अवैध उत्खनन
फर्जी परमिट से अवैध खनन, पर्यावरणीय क्षति। हाईकोर्ट ने 2024 में इस पर सख्ती की।
4 मामले, काला धन करोड़ों में; स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित।
नैनपुर (मंडला)
हत्या का प्रयास और न्यायालय अवमानना
गैंगस्टर रज्जाक के साथी के रूप में हत्या की साजिश। नैनपुर सत्र न्यायालय में धोखाधड़ी।
2 मामले, राजनीतिक कनेक्शन के कारण फरारी लंबी चली।
अन्य (मध्य प्रदेश)
फर्जीवाड़ा और धमकी
कुल 18+ मामले, जिसमें निवेश ठगी, फर्जी दस्तावेज और धमकी शामिल।
सैकड़ों पीड़ित, कुल ठगी 2 करोड़+ रुपये।
ये मामले भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 420 (ठगी), 467 (फर्जीवाड़ा), 506 (आपराधिक धमकी) और आईटी एक्ट के तहत दर्ज हैं। अमित ने 2018 में सर्व समाज कल्याण पार्टी से जबलपुर उत्तर विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ा था, जो उसके राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है।
कानूनी कार्रवाई और पीड़ितों के लिए उम्मीद
अदालत में पेशी के बाद अमित के खिलाफ दर्ज सभी मामलों की सुनवाई तेजी से होने की संभावना है। पुलिस ने उसकी संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें जबलपुर और मंडला में स्थित अवैध संपत्तियां शामिल हैं। इससे प्रभावित सैकड़ों पीड़ितों को न्याय मिलने की राह खुलेगी। एक पीड़ित ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “अमित ने मेरे जीवन की कमाई उड़ा दी, लेकिन अब न्याय की उम्मीद है।” हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह गिरफ्तारी पुलिस की सक्रियता का प्रमाण है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे माफियाओं के नेटवर्क को तोड़ने के लिए और सख्ती जरूरी है।
प्रभाव: अपराध जगत में दहशत का संदेश
अमित की गिरफ्तारी ने जबलपुर और मध्य प्रदेश के अपराधी तत्वों में दहशत फैला दी है। उसके जैसे ठगों ने सैकड़ों परिवारों को बर्बाद किया, लेकिन पुलिस की इस सफलता से आम जनता में विश्वास बढ़ा है। हालांकि, सोशल मीडिया पर पुरानी पोस्ट्स से पता चलता है कि अमित के राजनीतिक कनेक्शन के कारण उसकी फरारी लंबी चली।अब सवाल यह है कि क्या अन्य फरार साथी भी जल्द पकड़े जाएंगे?

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