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पेनाल्टी सहित 72 करोड़ की वसूली होगी पर दयालु मंडी सचिव ने भेजा सिर्फ 8 करोड़ का नोटिस

पेनाल्टी सहित 72 करोड़ की वसूली होगी पर दयालु मंडी सचिव ने भेजा सिर्फ 8 करोड़ का नोटिस

दस साल तक बिना मंडी टैक्स चुकाए चलती रही निजी सब्जी-फल मंडी और कुंभकर्ण कृषि उपज मंडी मदहोश रही

ईओडब्ल्यू में शिकायत पर जांच हुई तो कुड़मुड़ाए मंडी के अफसरों ने नए सिरे से कर डाली लीपा-पोती

शिव-सत्ता से लगाया जा रहा चूना मोहन सत्ता तक निडरता से

कटनी। शिवसत्ता में जबलपुरिया शीर्ष नेता ने रायता फैलाकर कटनी कृषि उपज मंडी को करोड़ों रूपए मंडी टैक्स का चूना लगवाया और अवैध रूप से बसाई गई प्राइवेट मंडी चाका में फल-सब्जी का कारोबार बिना हिसाब किताब के सन 2012 से 2022 तक धड़ल्ले से चलता रहा। मंडी समिति को फूटी कौड़ी टैक्स की नहीं मिली। पूर्व कलेक्टर अवि प्रसाद ने इस पर सख्त संज्ञान लेकर प्राइवेट मंडी की बादशाहत को दफनाया और 2022 में थोक सब्जी-फल का कारोबार कृषि उपज मंडी में शिफ्ट हुआ। पहले ही साल शासन को 52 लाख रूपए की आय हुई। फुटकर फल सब्जी विक्रेता संघ ने इसकी शिकायत आर्थिक अपराध अनुसंधान (ईओडब्ल्यू) में दी और उसने मंडी प्रशासन से रिपोर्ट मांग ली। जिस पर चालाकी की आंकड़ेबाजी के साथ मंडी सचिव ने भी दस वर्ष की टैक्स चोरी कुल 8 करोड़ निर्धारित कर निजी मंडी के संचालक को नोटिस दिया और टैक्स चोरी पर लगने वाला नौ गुना अधिभार (पेनाल्टी) का पूरी तरह गोलमाल कर दिया। इसमें भी वसूली के नाम पर कार्यवाही शून्य है। इस मंडी टैक्स घोटाले पर कलेक्टर को संज्ञान लेकर 64 करोड़ की शासकीय हानि को बचाना ही होगा।

सन 2005 से कटनी में बिलैया तलैया के पास थोक-फुटकर सब्जी-फल विक्रेता मंडी संचालित है। इस बीच थोक मंडी को शासकीय कृषि उपज मंडी में व्यापार करने के लिए मुकदमेबाजी हुई और हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि व्यापारी कृषि मंडी में लाइसेंस लेकर कारोबार करें। लेकिन जबलपुर-दमोह के दो कद्दावर भाजपा नेताओं के दम पर आदर्श थोक फल एवं सब्जी विक्रेता व्यापारी संघ ने निजी प्राइवेट मंडी की स्थापना कुठला में कर ली।इस तरह सरकारी मंडी की बजाय प्राइवेट थोक मंडी में थोक सब्जी फल व्यापार का टेक्स फ्री संचालन शुरू हो गया। कलेक्टर-मंडी सचिव की हिम्मत नहीं थी कि जबलपुर-दमोह के भाजपा नेताओं की जुगलबंदी का विरोध करने सामने आ सके। संरक्षक नेताओं का प्रभाव एक्सपायर्ड होते ही सन 2022 में कलेटर ने प्राइवेट मंडी राज का खात्मा करा दिया और कृषि उपज मंडी में कारोबार शिफ्ट हो गया। पहले ही वर्ष में शासन को 52 लाख रूपए टैक्स की आय हुई।
ध्यान रहे कि निजी मंडी ने अपने राजकाज में दस साल तक कोई मंडी टैक्स नहीं दिया था इसकी पुष्टि मंडी सचिव ने की है l
इस भर्रेशाही के खिलाफ सबूत जुटाते हुए साईं सब्जी मंडी व्यापारी संघ ने ईओडब्ल्यू को शिकायत कर दी। संघ के पदाधिकारी कृष्ण हरि कछवाह ने लोकायुक्त को शिकायत देते हुए बताया कि राजपत्र में जून 2003 से सब्जी-फल के थोक-विक्रय पर दो प्रतिशत मंडी शुल्क निर्धारित किया है। निजी मंडी संचालन कर रहे आदर्श थोक फल सब्जी विक्रेता संघ द्वारा 2012 से 2022 तक मंडी संचालन किया जाता रहा, मगर टैक्स मंडी कार्यालय में कभी जमा नहीं कराया।

निजी मंडी ने टैक्स नहीं चुकाया अथवा सरकारी मंडी ने नहीं लिया और खिचड़ी पकती रही

मंडी प्रशासन ने प्रमाणित जानकारी दी कि प्राइवेट मंडी चाका के सन 2012 में खुलने के पहले से 2003 से 2012 तक बिलैया तलैया वाली पुरानी मंडी से शासन को टैक्स मिलता रहा था l लेकिन 2012 में प्राइवेट मंडी बनने के बाद से 2022 तक कोई टैक्स नहीं मिला। प्राइवेट मंडी में 110 प्राइवेट थोक विक्रेता व्यापार कर रहे थे। बताया गया कि उस समय प्रतिदिन पचास लाख से अधिक का व्यापार होता था, मगर मंडी टैक्स नहीं दिया गया। प्राइवेट मंडी वाले इसके लिए मुकदमेबाजी की आड़ लेकर अपनी चूक का बचाव करते है। सन 2023 में कृष्णहरि कछवाह की शिकायत पर लोकायुक्त ने मंडी टैक्स चोरी की जांच शुरू की और प्राथमिक जांच रिपोर्ट मंडी सचिव से तलब की।

मंडी टैक्स का आंकलन नियमों के विपरीत हुआ

ईओडब्ल्यू जबलपुर ने मंडी टैक्स घोटाले की शिकायत को भोपाल भेजा और कलेक्टर तक इसकी जांच करने के निर्देश हुए। अवि प्रसाद ने पहले तो प्राइवेट मंडी की हुकूमत को खत्म किया और मंडी प्रांगण में थोक बाजार शिफ्ट हुआ, पहले साल 52 लाख का टैक्स आया।

सनद रहे -52 लाख की आय, कमीशन घटाकर हुई थी

मंडी प्रांगण में निडरता से चर्चा होती है कि मंडी कर्मचारी ( टैक्स संग्रहकर्ता ) 50 फीसदी से अधिक टैक्स चोरी करते करवाते हैं, स्वयं रखते हैं ऊपर तक पहुंचाते हैं और कम आवक शो करके कम टैक्स वसूलते हैं। उसके बाद भी 52 लाख की शुद्ध आय हुई जबकि इतना ही कमीशन टैक्स जोड़े तो चर्चित आय 1 करोड़ वार्षिक से अधिक होती है।
नए मंडी सचिव ने जाने किस आधार पर जबलपुर के मंडी अधिकारी की देखरेख में दस वर्षों में मात्र 8 करोड़ का टैक्स वसूली निकाली है। इसमें यदि मंडी टैक्स की चोरी की पेनाल्टी (पांच से नौ गुना) घटा दी जाए तो मंडी प्रशासन ने साल भर में प्राइवेट मंडी की चोरी मात्र डेढ़ पौने दो लाख वार्षिक जोड़ी है, जबकि आधार वर्ष 2023 में 52 लाख यानी चालीस पचास गुना टैक्स प्रमाणित है। नवागत कलेक्टर से अपेक्षा है कि वे इस दोषपूर्ण पूर्णत: संदिग्ध 8 करोड़ की टैक्स वसूली की रिपोर्ट का पुनरीक्षण कराएंगे।

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