Advertisement

परम तपस्वी संत त्यागीजी महाराज ने तोड़ा कठोर अनशन: जल व प्रसाद ग्रहण से भक्तों में उल्लास की लहर

परम तपस्वी संत त्यागीजी महाराज ने तोड़ा कठोर अनशन: जल व प्रसाद ग्रहण से भक्तों में उल्लास की लहर


आध्यात्मिक तपोभूमि ज्ञान तीर्थ में विश्व कल्याण की प्रार्थनाएं गूंजीं, स्वास्थ्य को लेकर व्यक्त की गई थी गहन चिंता
कटनी (मध्य प्रदेश), 13 अक्टूबर 2025: आध्यात्मिक जगत में ‘मानव से देवता बनाने की फैक्ट्री’ के रूप में विख्यात ज्ञान तीर्थ विलायत कलां आश्रम में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ है। परम तपस्वी संत त्यागीजी महाराज, जो विगत कई दिनों से कठोर तपस्या के अंतर्गत जल और भोजन का पूर्ण त्याग कर रहे थे, ने आज भक्तों की भावनाओं का सम्मान करते हुए जल ग्रहण करना प्रारंभ किया। साथ ही, उपलब्ध प्रसाद को भी यथास्थिति ग्रहण किया। इस घटना को आश्रम परिवार और विश्वभर के अनुयायियों ने दिव्य संकेत के रूप में देखा, तथा संतश्री के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।
ज्ञान तीर्थ विलायत कलां, जो कटनी जिले में स्थित है, एक ऐसा पवित्र स्थल है जहां आत्मशुद्धि, अध्यात्मिक अध्ययन और विश्व कल्याण के कार्य निरंतर संचालित होते हैं। संत त्यागीजी महाराज की तपोभूमि को वैश्विक स्तर पर उन दुर्लभ स्थलों में गिना जाता है जहां मानवता को देवत्व की ओर अग्रसर करने का सतत प्रयास किया जाता है। यहां के आध्यात्मिक वातावरण में ध्यान, योग, वेदांत अध्ययन और तपस्या जैसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होते हैं, जो भक्तों को आंतरिक शांति और आत्मिक उन्नति प्रदान करते हैं। संत त्यागीजी की तपस्या न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बल्कि सामूहिक रूप से विश्व शांति और मानव कल्याण की दिशा में प्रेरणा स्रोत बनी हुई है।
विगत दिनों संत त्यागीजी महाराज ने अपनी तपस्या को और गहन बनाने के लिए जल एवं भोजन का त्याग किया था। इस संकल्प ने आश्रम के अनुयायियों और भक्तों में एक अनोखी लहर पैदा की, जहां कई भक्तों ने भी उनके साथ जल-भोजन त्याग का व्रत लिया। हालांकि, इस कठोर तप के कारण संतश्री के स्वास्थ्य को लेकर आश्रम परिवार में गहन चिंता व्याप्त थी। देश-विदेश से जुड़े भक्तों ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अपनी भावनाएं व्यक्त कीं, तथा संत के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थनाएं कीं। आश्रम के प्रमुख संरक्षक पंडित प्रकाश भोमिया जी ने बताया कि संत त्यागीजी की तपस्या मानवता के लिए एक आदर्श है, लेकिन उनके स्वास्थ्य की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।
आज की इस घटना ने सभी की चिंताओं पर विराम लगा दिया। संत त्यागीजी ने जल ग्रहण के साथ प्रसाद को ग्रहण किया, जो आश्रम में उपलब्ध फलाहार और पवित्र सामग्री से तैयार था। इस अवसर पर आश्रम में उपस्थित प्रमुख भक्तों में मंजू सोनी जी, अरविंद तिवारी जी, डॉ. नीरज तिवारी जी, उमेश वैद्य जी (सागर), दिलीप तिवारी जी, विष्णु चौहान जी, दिनेश मित्तल जी, ज्ञानी जी, महंत रामचरण दुबे जी (नागपुर), हेमंत सोनी जी, संजय तिवारी जी, डॉ. पुरुषोत्तम दुबे जी, शिवकर जी सहित अनेक समर्पित अनुयायी शामिल थे। इन सभी ने हर्ष और श्रद्धा के साथ इस पल को मनाया।
भक्तों ने एक स्वर में प्रार्थना की: “परम तपस्वी संत त्यागीजी महाराज स्वस्थ, सशक्त और दीर्घायु रहें। उनका तपोबल मानवता को देवत्व की दिशा में अग्रसर करता रहे।” आश्रम परिवार का मानना है कि यह घटना परम पिता परमात्मा की प्रेरणा से हुई है, जो विश्व कल्याण की दिशा में एक नया अध्याय जोड़ती है।
ज्ञान तीर्थ स्वर्ग धाम, विलायत कलां में अध्यात्मिक अध्ययन और तपस्या के इच्छुक व्यक्ति संपर्क कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए फोन नंबर 7566239315 पर संपर्क करें। यह घटना आध्यात्मिक जगत में नई ऊर्जा का संचार कर रही है, जहां तपस्या और स्वास्थ्य का संतुलन एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!