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भीलवाड़ा में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट दिखे एक ही मंच पर

सत्यार्थ न्यूज़ भीलवाड़ा

अब्दुल सलाम रंगरेज

भीलवाड़ा में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट दिखे एक ही मंच पर

पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय शिवचरण माथुर और उनकी धर्मपत्नी सुशीला माथुर की मूर्तियों का किया अनावरण

भीलवाड़ा


भीलवाड़ा में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने सुशीला देवी कन्या महाविद्यालय परिसर में स्वर्गीय शिवचरण माथुर और उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीय सुशीला देवी माथुर की मूर्तियों का अनावरण किया गया। इस अवसर पर दोनों ही नेता एक ही मंच पर नजर आए।
मूर्ति अनावरण कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का मंगलवार को मांडलगढ़ पहुंचने पर कार्यकर्ताओं द्वारा भव्य स्वागत किया गया। शाम को वह भीलवाड़ा सर्किट हाउस पहुंचे। बुधवार को सुशीला देवी माथुर कन्या महाविद्यालय परिसर में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिसमें क्षेत्र के कई कांग्रेसी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए वंदना माथुर एवं विभा माथुर ने लगातार मांडलगढ़ क्षेत्र एवं भीलवाड़ा के ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर 8 अक्टूबर को होने वाले मूर्ति अनावरण समझ में आने का न्योता दिया।

कार्यक्रम का आयोजन सुशीला देवी कन्या महाविद्यालय परिसर में किया गया, जिसकी स्थापना स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय माणिक्यलाल वर्मा ने की थी। इस अवसर पर कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे, जिनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री एम.एम. पल्लम राजू, एआईसीसी मीडिया विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा, पूर्व मंत्री बी.डी. कल्ला, पूर्व मंत्री हेमाराम चैधरी और दौसा सांसद मुरारीलाल मीणा शामिल थे।
सचिन पायलट ने कहा कि आज देश और प्रदेश की राजनीति में नैतिकता की कमी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सुधार तब ही संभव है जब हम अपने कहने और करने में समानता रखें और अपने आचरण से उदाहरण प्रस्तुत करें। पायलट ने स्व. शिवचरण माथुर के जीवन को जनसेवा, निष्ठा और सादगी का प्रतीक बताया और उनके महिला शिक्षा व सशक्तिकरण के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यदि राजनीति में ऐसे आदर्श और मूल्य फिर से स्थापित किए जाएं, तो समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भावुक होकर बताया कि उनका माथुर जी के साथ गहरा व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंध रहा। उन्होंने कहा कि माथुर जी ने दो बार राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में सुशासन दिया और असम के राज्यपाल के रूप में भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। गहलोत ने सुशीला देवी कन्या महाविद्यालय और मांडलगढ़ राजकीय महाविद्यालय के नामकरण की जानकारी साझा करते हुए बताया कि ये कार्य उनके कार्यकाल में संपन्न हुए।

कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने मूर्तियों पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया।

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