संवाददाता अय्यूब आलम
गोंडा पूर्वी हिंदुस्तान की प्रसिद्ध खानकाह दरबार ए आलिया मीनाईया में जश्ने ईद मिलादुन्नबी व जश्ने दस्तार बंदी का प्रोग्राम हज़रत शाह जमाल मीना साहब की सरपरस्ती में हुआ। बाद नमाज़े जोहर हुजूर पैगम्बरे इस्लाम, हज़रत मौला अली,हज़रत इमाम हसन व इमाम हुसैन एवं हुजूर गौसे आजम के मुए मुबारक (पवित्र बाल) की जियारत कराई गई। हजारों अकीदतमंदों ने जियारत की। बाद नमाजे ईशा ईद मिलादुन्नबी की महफिल हुई जिसका संचालन नजमुल हुदा ने किया।
प्रसिद्ध इस्लामिक वक्ता मुफ्ती शमशाद साहब अपने सम्बोधन में शिक्षा के महत्व को बताया एवं बाबा जी द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में के किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की। इनके अलावा मौलाना मुज़क्किर एवं मुफ्ती नईम अज़हरी ने मीनाईया द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों से लोगों को अवगत कराया। आज़म मीनाई,जावेद सिद्दीकी, अब्दुल कादिर आदि ने नात व मनकबत पेश किया। दस्तारबंदी (दीक्षांत समारोह) में नज़मुल हुदा, अब्दुल हसीब, मोहम्मद फरहान, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद सलमान, समीम अहमद, मो जुनेद, मो सूफियान मो मारूफ, ग़ुलाम रज़ा, अरशद रज़ा,मो गुफरान, वारिश खान , मो गुलाम रज़ा, अरमान अली, फैजान रज़ा समेत 47 छात्रों को दस्तार ने नवाज़ा गया। मंगलवार को दिन में कुल शरीफ की महफिल हुई। मसीह आलम ने पढ़ा कि वो जिसने आप की चौखट से लौ लगाई है ग़मे हयात से उसने निजात पाई है क़ारी अब्दुल कादिर ने पढ़ा कि
पूछिए न अज़मत वा शौकत हमारे पीर की औज पर है बाखुदा हमारे पीर की
अरमान रज़ा ने पढ़ा कि तेरे संगे अस्ता से रिश्ते है पुराना रहे उम्र यूंही तेरे दर पे आना जाना इनके अब्दुल हफीज, कलीम सुल्तानपुरी, मुकीम मुशाहिदी आदि ने अपने कलाम व मंक़बत पेश किए।

अंत में दुआ ख्वानी हुई जिसमें मुल्क की तरक्की व खुशहाली के लिए दुआ की गई। इस अवसर पर कारी निसार मीनाई, डॉ लायक अली, फकीर मोहम्मद मीनाई, कारी ख़ल्क़ उल्लाह साहब मेंहदी रज़ा, मास्टर साजिद, एहसान मीनाई, तबरेज आलम मीनाई रफीक मीनाई, बीबी लाल श्रीवास्तव, अजय बाबू, विभूति मणि त्रिपाठी समेत सैकड़ों अकीदतमंत मौजूद रहे।















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