कटनी जिले में बढ़ते अवैध खनन का काला कारोबार: जरवाही ग्राम में खुलेआम मुरुम उत्खनन, जिम्मेदार अफसरों की खामोशी ने बढ़ाई चिंता

*कटनी, 24 सितंबर 2025*: मध्य प्रदेश के कटनी जिले में अवैध खनन की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। जिले के ग्राम जरवाही में निवार चौकी अंतर्गत खुलेआम अवैध मुरुम (मिट्टी का एक प्रकार का खनिज) का उत्खनन हो रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं। स्थानीय ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होने से इलाके में अपराधियों का हौसला बुलंद होता जा रहा है।
यह मामला जिले स्तर पर एक गंभीर समस्या का रूप ले चुका है, जहां अवैध खनन न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी करोड़ों का चूना लगा रहा है। जरवाही जैसे ग्रामीण इलाकों में बिना किसी अनुमति के जेसीबी मशीनों से मुरुम की खुदाई की जा रही है, जो नदी-नालों के किनारों को कमजोर कर बाढ़ जैसी आपदाओं को न्योता दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि रात के अंधेरे में ट्रक और हाईवा लोड होकर निकलते हैं, लेकिन निवार चौकी प्रभारी और खनिज विभाग के अधिकारी इस पर आंखें मूंदे हुए हैं।

कटनी जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार, जिले में खनन गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश जारी हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति उलट है। हाल ही में कटनी पुलिस ने अवैध मुरुम परिवहन के खिलाफ अभियान चलाया था, जिसमें कई वाहनों को जब्त किया गया था। फिर भी, जरवाही जैसे दूरस्थ गांवों में यह कारोबार फल-फूल रहा है। पर्यावरणविदों का मानना है कि यह अवैध उत्खनन मिट्टी कटाव, जल स्तर में कमी और जैव विविधता के विनाश का कारण बन रहा है।
स्थानीय निवासियों ने कलेक्टर कार्यालय और एसपी कटनी को शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अब तक कोई राहत नहीं मिली। यदि शीघ्र कार्रवाई न हुई, तो यह जिले के अन्य क्षेत्रों में फैल सकता है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि निवार चौकी के अधिकारियों पर सख्ती बरती जाए और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो। कटनी जिला, जो जबलपुर संभाग का हिस्सा है, पर्यावरण संरक्षण के मामले में पिछड़ता जा रहा है, जबकि राज्य सरकार अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस की नीति की बात करती है।

यह घटना जिले की खनन नीति की पोल खोल रही है, जहां लाइसेंसधारी कंपनियां तो फायदे उठा रही हैं, लेकिन अवैध कारोबारी बिना डरे सक्रिय हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई न हुई तो वे सामूहिक विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। कटनी प्रशासन को अब तुरंत जांच टीम गठित कर इस मामले को संज्ञान में लेना चाहिए, ताकि जिले का पर्यावरण और ग्रामीणों का भविष्य सुरक्षित रहे।

















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