मंत्री जी पहुंच गए अनुसूचित जाति के संतोष परोचे के घर भोजन करने
बरेली रायसेन से कृष्णकुमार भार्गव की रिपोर्ट

पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर पुस्तक लिखने वाले मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने दिया सामाजिक समरसता का संदेश: अनुसूचित जाति के परिवार में किए भोजन
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उदयपुरा/बरेली/रायसेन। कई बार पर नेताओं की करनी और कथनी में भेद की बात कही जाती है, लेकिन मध्यप्रदेश शासन के मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने यह सिद्ध करते रहते हैं कि वे जो कहते हैं, वह करते भी हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद की व्याख्या करने वाले श्री पटेल ने सोमवार को यह जता दिया कि वे समाज के अंतिम छोर के व्यक्तियों की सबसे पहले चिंता करते हैं। अवसर था पिपरिया पुंआरिया के अनुसूचित जाति के संतोष परोचे के घर पहुंचकर भोजन करने का।
दरअसल, मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने अपने उदयपुरा विधानसभा में प्रवास से पहले सोशलमीडिया पर किसी परिवार में भोजन की इच्छा जताई थी। इसके बाद उन्हे निमंत्रित करने वालों की भीड़ लग गई। उन्होने सभी आमंत्रण सूचीबद्ध किए और इसमें समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति के रूप में छातेर के पास पिपरिया—पुंआरिया के अनुसूचित जाति के संतोष परोचे के परिवार को पाया। वे सोमवार को जब इस परिवार में भोजन करने के लिए पहुंचे तो यह गांव, क्षेत्र और अन्य लोगों के लिए चौंका देने वाला था। इसे सिद्धांतों को व्यवहार में जीने की मंत्री श्री पटेल की शैली का एक और उदाहरण कहा जा रहा है। श्री परोचे के परिजन मंत्री महोदय को अपने घर भोजन करते देखकर इतने भावविह्वल थे कि सभी की आंखें हर्ष के अतिरेक में नम थीं और कुछ कह नहीं पा रहे थे।
सामाजिक समरसता का दिया संदेश
इस संवाददाता ने गांव के कई लोगों से बात की तो वे इसे मंत्री जी के अनुसूचित जाति के परिवार में भोजन करने को सामाजिक समरसता का व्यावहारिक संदेश बता रहे थे। अन्य लोगों का कहना था कि वे विधानसभा क्षेत्र के लोगों को परिजन कहते हैं। एकबार फिर उन्होने दिखा दिया कि मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल भौतिक विकास के साथ ही वंचित वर्ग के सामाजिक विकास की भी उतनी ही चिंता करते हैं।
हुआ था तिरस्कार
कुछ गांव वालों ने एक घटना का भी उल्लेख किया। बताया गया कि समाज को जोड़ने के लिए काम करने वाले कुछ लोगों ने संतोष परोचे के यहां श्राद्ध पर भोजन किए थे। इससे हिंदू समाज में फूट डालने वाले लोगों ने संगठित होकर उन लोगों का तिरस्कार करते हुए उन पर गंगाजी नहाने सहित कई शर्तें लादी थीं। मंत्री जी का यह कदम ऐसे तत्वों को करारा जबाब भी माना जा रहा है।
इनका कहना है—
क्या वास्तव में ऐसा हुआ
मेरे परिवार के साथ ही हमारी संपूर्ण जाति और क्षेत्र के लिए आज का दिन यादगार बन गया है। वह हुआ, जिसका सपना भी नहीं देखा जा सकता था। लोग फोन कर—करके पूछ रहे हैं कि क्या वास्तव में ऐसा हुआ है। मंत्री जी ने हमारी पीढ़ियों को ऋणी कर दिया।
—संतोष परोचे
पिपरिया—पुंआरिया
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अपने परिजन, अपना घर
मैं अपने विधानसभा के लोगों को अपना परिजन मानता हूं। परिजनों का घर मेरा घर है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी पर मैने पुस्तक भी लिखी है और उनके एकात्म मानववाद को जीने का प्रयास करता रहा हूं। अन्य आमंत्रण भी मैने सूचीबद्ध कर लिए हैं। इनके घर भी भोजन करने का प्रयास करूंगा।
—नरेंद्र शिवाजी पटेल
मंत्री मप्र शासन, विधायक उदयपुरा


















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