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रामलीला के दूसरे दिन राम जन्म लीला दिखलाया गया वह दुर्गा जी का झांकी कार्यक्रम आयोजित किया गया

(दुद्धी सोनभद्र रिपोर्ट नितेश कुमार) विंढमगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत में रामलीला मंचन के दूसरे दिन रविवार की रात रामजन्म लीला का भव्य मंचन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत रामायण की आरती से हुई। इसके उपरांत मां दुर्गा द्वारा महिषासुर वध की झांकी प्रस्तुत की गई, जिसने उपस्थित दर्शकों को रोमांचित कर दिया।उसके बाद व्यास दिलीप कुमार कन्नौजिया के मधुर स्वर में जब रामचरितमानस की चौपाई जाड़े खल बहु चोर जुआरा गूंजी, तो पूरा पंडाल गूंज उठा। दर्शकों ने ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से वातावरण को राममय बना दिया।

राम जन्म कथा का जीवात मंचन

कथा की शुरुआत अयोध्या नरेश दारच के दरबार से हुई। पुत्रहीन होने की पीड़ा से व्याकुल महाराज दशरथ ने गुरु वशिष्ठ की आजा से पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। यज्ञ पूर्ण होने पर अग्निकुंड से दिव्य खीर प्राप्त हुई, जिसे महाराज ने अपनी रानियों कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा को प्रसाद स्वरूप वितरित किया।

समय बीतने पर रानी कौशल्या ने श्रीराम को, कैकेयी ने भरत को तथा सुमित्रा ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया। जैसे ही मंच पर चारों राजकुमारों का अवतरण दिखाया गया, पूरा मैदान गगनभेदी नारों से गूंज उठा। महिलाओं ने मंगलगीत गाकर वातावरण को और भी दिव्य बना दिया।भीड़ का उत्साह रामजन्ना की इस अलोकिक लीला को देखने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। पंडाल खचाखच भरा रहा और दर्शकों ने खड़े होकर भी पूरी श्रद्धा से गंचन का आनंद लिया। नालियों और जयकारों ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानों अयोध्या नगरी स्वयं महली के रामलीला पंडाल में अवतरित हो गई हो।गुरुकुल गमन का दृश्य रामजन्म के उपरांत लीला का समापन उस अद्भुत प्रसंग से हुआ, जब भगवान राम अपने तीनों भाइयों भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के साथ गुरु वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा सहष्ण करने के लिए प्ररधान करते हैं। इस दृश्य ने दर्शकों को आदर्श जीवन मूल्यों और गुरु-शिष्य परंपरा की याद दिलाई।अगली लीला की घोषणा रामलीला मंडली वो व्यास दिलीप कुमार कन्नौजिया ने बताया कि सोमवार 22 सितंबर की रात ताड़का वध लीला का मंचन किया जाएगा। इस घोषणा के साथ ही दर्शकों में अगले दिन की लीला देखने को लेकर उत्सुकता और उत्साह और भी बढ़ गया।

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