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राजस्थान में विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025″ के खिलाफ एसडीपीआई ने सौंपा ज्ञापन-

सत्यार्थ न्यूज़भीलवाड़ा

अब्दुल सलाम रंगरेज

राजस्थान में विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025″ के खिलाफ एसडीपीआई ने सौंपा ज्ञापन-


भीलवाड़ा

राजस्थान की बीजेपी सरकार द्वारा पारित “राजस्थान विधिविरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025” के विरोध में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया की तरफ से जिला महासचिव मोहम्मद सलीम ने राज्यपाल महोदय के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराते हुए बताया कि राजस्थान की भाजपा सरकार ने अपने बहुमत के बल पर 9 सितंबर को विपक्ष के बहिष्कार और बिना किसी सार्थक बहस के एक ऐसा गैर संविधानिक विधेयक पारित किया है जो न केवल भेदभाव पूर्ण है बल्कि संविधान, लोकतंत्र और देश के व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं पर बड़ा हमला है । यह भारत के सभी अल्पसंख्यक समुदाय के संविधान द्वारा दिये गये मूल अधिकारों को छीनने वाला और संविधान के मूल ढांचे पर हमला करने वाला है ,जबकि देश का संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को अपनी मर्जी का धर्म मानने और उसका प्रचार प्रचार करने का अधिकार देता है ।

जिला अध्यक्ष इकबाल मंसूरी ने इस विधेयक में प्रचार प्रसार के अधिकार को भी जबरन धर्मांतरण के प्रलोभन के दायरे में शामिल करके सजा का प्रावधान का विरोध किया और कहा कि ये सीधा सीधा मौलिक अधिकारों पर हमला है| साथ ही यह कानून भारतीय संविधान के पूरी तरह से खिलाफ हे जो कि अनुच्छेद 14, 19, 21 व 25 का उल्लंघन करता है और इस नए कानून के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति किसी पर धर्मान्तरण के प्रलोभन का आरोप लगा देता है तो जिसे आरोपी बनाया गया उसे ही साबित करना होगा कि वह निर्दोष है ऐसे में तो इस संविधान विरोधी कानून का दुर्भावनापूर्ण तरीके से इस्तेमाल कर किसी भी व्यक्ति को फंसाया जा सकता है ।

जिला उपाध्यक्ष एडवोकेट जाकिर हुसैन ने इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि राज्य के ग्रह मंत्री ने इसमें लव जिहाद, विदेशी फंडिंग और जन सांख्यिकीय परिवर्तन जैसी बेबुनियाद बातों का हवाला दिया है ।इस कानून का उद्देश्य संवेधानिक अधिकारों की रक्षा नहीं बल्कि अल्पसंख्यकों को कलंकित करना है, जब कि देश का संविधान देश के सभी धर्मों का समानता प्रदान करता है और पूरे संविधान में कहीं भी किसी धर्म विशेष को देश का मूल धर्म नहीं बताया गया है, इसके बावजूद इस विधेयक में प्रावधान है कि यदि कोई मुसलमान, ईसाई और अन्य धर्म का व्यक्ति हिन्दू धर्म स्वीकार करता है तो उसे धर्मान्तरण नहीं माना जायेगा। यह प्रावधान तो सीधा संविधान के समता और समानता के संवैधानिक अधिकारों को भी समाप्त करता है।

एसडीपीआई भीलवाड़ा जिला कमेटी द्वारा दिए गए ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल महोदय से मांग की गई कि इस गैर संवेधानिक कानून पर हस्ताक्षर नहीं करें और देश के संविधान को बचाने के अपने कर्तव्य का निर्वहन करें।

इस मौके पर जिला महासचिव आजाद जावेद , जिला सचिव व एसडीपीआई पार्षद हाजी सलीम अंसारी,कोषाध्यक्ष अनवर मंसूरी , एसडीपीआई पार्षद नाथू लाल राव , परवेज शेख राजू खान भीलवाड़ा विधानसभा अध्यक्ष जाकिर हुसैन मंसूरी , सचिव आसिफ अंसारी, फुरकान अंसारी अनवर हुसैन, इरफान लुहार आबिद शेख सहित जिला कमेटी एवं विधानसभा कमेटी मेंबर और कार्यकर्ता मौजूद रहे ।

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