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सोनभद्र -एस आई आर और 130 वें संविधान संशोधन विधेयक पर भाकपा कार्यकर्ताओं का कलेक्ट्रेट में जोरदार विरोध प्रदर्शन।

 

 

 

एस आई आर और 130 वें संविधान संशोधन विधेयक पर भाकपा कार्यकर्ताओं का कलेक्ट्रेट में जोरदार विरोध प्रदर्शन।

 

भाकपा द्वारा कलेक्ट्रेट पर विरोध प्रदर्शन के दौरान नगवां बांध के विस्थापितों को न्याय और जनपद में कैमूर आदिवासी विश्वविद्यालय की स्थापना कराने की मांग को भी उठाया गया।

 

सोनभद्र /सत्यनारायण मौर्य/संतेश्वर सिंह

Mo 9580757830

सोनभद्र, सोमवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा SIR ( विशेष पुनरीक्षण) बिहार के संदर्भ में और 130 वें संविधान संशोधन को वापस लेने तथा नगवां बांध के विस्थापितों को न्याय व अन्य मुद्दों को लेकर सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ सोनभद्र जिला कलेक्ट्रेट पर विरोध प्रदर्शन कर धरना दिया गया । उससे पहले भाकपा कार्यकर्ता चुनाव आयोग के खिलाफ और अपने मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए मुख्यालय गेट से जुलूस से निकलकर जिलाधिकारी कार्यालय पर पहुंचे। जहां कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओ द्वारा जोरदार प्रदर्शन करते हुए धरना दिया गया ।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव कामरेड आर के शर्मा के नेतृत्व में प्रदर्शन करते हुए SIR और 130 वें संविधान संशोधन के विरोध में राष्ट्रपति को और अन्य स्थानीय मुद्दों पर राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन एसडीएम ( नमामि गंगे )को सौंपा गया ।

जहां भाकपा जिला सचिव कामरेड आर के शर्मा ने बताया कि आज पूरे उत्तर प्रदेश में भाकपा द्वारा विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम है। बिहार में एस आई आर से 65 लाख मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से बाहर कर देने की प्रबल आशंका से जगह जगह विरोध हो रहा है। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने राशन कार्ड और आधार जैसे बुनियादी साक्ष्य को अस्वीकार कर दिया।जिसे माननीय सुप्रीम कोर्ट ने राशन कार्ड,आधार और वोटर कार्ड को दस्तावेज के रूप में मानने की सलाह दी है।वोटों में हेरा फेरी और वोटो की चोरी का मामला प्रकाश में आने पर पूरे देश के मतदाताओं में खलबली मच गई है, यह कहीं न कहीं चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे फर्जीवाड़े को दर्शाता है।जनतंत्र में शासन की गलत नीतियों का विरोध करने का अधिकार देश की जनता को भारत के संविधान द्वारा प्रदान किया गया है।

धरने के दौरान पार्टी के नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि 130 वे संविधान संशोधन विधेयक के आधार पर निर्वाचित मुख्यमंत्रियों,मंत्रियों को 30 दिन जेल में रहने पर उन्हें बर्खास्त करने का अधिकार देता है।इससे भारत को फासीवादी राज्य की ओर धकेलने की एक सोची समझी साजिश है और यह भारत के संघीय ढांचे पर कुठाराघात है।बीजेपी के शासनकाल में चुने हुए विरोधी नेताओं को जेलों में डाल दिया जाता है। वही चुने नेता,मंत्री जब बीजेपी में शामिल हो जाते हैं तो उन्हें क्लीनचिट दे दिया जाता है। भाकपा मोदी सरकार की ऐसी नीतियों का पुरजोर विरोध सड़क से लेकर संसद तक कर रही है।

विरोध प्रदर्शन के दौरान जनपद के नगवां बांध के विस्थापितों के सवाल को भी उठाया गया। नेताओं का कहना रहा कि 80 के दशक में इस बांध का विस्तारिकरण किया गया, जिससे नौ गांवों की हजारों की आबादी आज भी विस्थापन का दंश झेल रही है। विस्थापन के समय वह जिस जमीन पर काबिज हो कर अपने जीवकोपार्जन को चला रहे हैं। आज वन विभाग द्वारा उन्हें बेदखल करने का हर हथकंडा अपनाया जा रहा है। विभाग द्वारा विस्थापितों का शोषण उत्पीड़न किया जा रहा है, जिसे तत्काल रोका जाना चाहिए और विस्थापितों को पुनर्वास जीवकोपार्जन के लिए खेती की जमीन व सभी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाना चाहिए। जनपद में उच्च शिक्षा के लिए कैमूर आदिवासी विश्वविद्यालय की स्थापना जरूरी है, इसके साथ ही यहां लोगों को बेहतर चिकित्सा के लिए बनाया गया ट्रामा सेंटर को तत्काल चालू कराया जाना चाहिए।

इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से वरिष्ट कॉमरेड चन्दन प्रसाद , अमरनाथ सूर्य, प्रेम चंद्र गुप्ता, देव कुमार विश्वकर्मा, राम जनम मौर्या, भुनेश्वर प्रसाद, सुरज वंसल, ज्योति रावत, गुलाब प्रसाद, नंदू गुर्जर, रामपति बिंद, नागेन्द्र कुमार, कांता प्रसाद, सरोज,श्रीदेवी, सबिता देवी, मोहम्मद मुस्तफा, कतवारू, बाबू लाल चेरो, बुधवंत, शंकर भारती आदि के साथ सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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