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एम्स भोपाल में ऑपरेशन कराना है तो सामान खुद लाएं:एजेंसी नहीं दे रही दवाइयां, इस साल 56 हजार ऑपरेशन घटे; डॉक्टर मरीज लौटा रहे

सत्यार्थ न्यूज़ ब्यूरो चीफ भोपाल मध्य प्रदेश प्रवीण कुमार दुबे 8839125553

एम्स भोपाल में ऑपरेशन कराना है तो सामान खुद लाएं:एजेंसी नहीं दे रही दवाइयां, इस साल 56 हजार ऑपरेशन घटे; डॉक्टर मरीज लौटा रहे


एम्स भोपाल में बीते साल अगस्त 2024 तक 60 हजार 687 ऑपरेशन्स हुए थे, जो इस साल अगस्त तक 4 हजार 508 रह गए।
भोपाल के AIIMS (ऑल इंडिया इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल साइंसेस) से मरीजों का भरोसा डगमगाने लगा है। दवाओं और ऑपरेशन कंज्यूमेबल्स की कमी के चलते ऐसा हो रहा है और यह कमी सेंट्रल एजेंसी पर भरोसा दिखाने के कारण हुई है। हालात ऐसे हैं कि एक से डेढ़ हफ्ते तक भर्ती रहने के बाद भी मरीज बिना सर्जरी लौट रहे हैं।
एम्स की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2024 में यहां ऑपरेशन का कुल आंकड़ा 60 हजार 687 था, जो इस साल अगस्त में 4 हजार 508 रह गया है। इस तरह पिछले अगस्त के मुकाबले इस साल लगभग 56 हजार सर्जरी कम हुई हैं।
यह स्थिति जनवरी 2025 से बनी हुई है। हर साल इलाज के लिए एम्स की ओपीडी में 10 लाख से अधिक मरीज पहुंचते हैं। यहां भर्ती मरीजों की संख्या 58 हजार से ज्यादा रहती है।
एम्स की फाइनेंशियल रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में यहां 11 हजार 547 माइनर सर्जरी, 18 हजार 156 मेजर सर्जरी और 6 लाख 98 हजार प्रोसीजर हुए। इसके बाद जनवरी 2025 में स्थिति बिगड़ती चली गई और लिस्ट भेजने के बाद भी जरूरी कंज्यूमेबल्स नहीं मिले।

सर्जिकल ग्लव्स और सिरिंज तक परिजन खरीद कर लेकर आ रहे हैं।
एम्स के एक सीनियर डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा- हमें मरीजों को लौटाना पड़ रहा है। हम बीते 8 माह से यह सुन रहे हैं कि एक से डेढ़ हफ्ते में स्थिति बदल जाएगी। मरीजों को परेशान होता देख अब हमसे रुका नहीं गया इसलिए यह पूरी जानकारी साझा कर रहे हैं। जिससे समस्या की गंभीरता और सुधार के लिए क्या जरूरी है, इसकी पूरी जानकारी जिम्मेदारों तक पहुंच सके।
कैप-ग्लव्स, दवा से लेकर सर्जिकल सामान तक की किल्लत एम्स में इन दिनों सर्जिकल कैप्स, ग्लव्स, मास्क, शुगर टेस्टिंग स्ट्रिप जैसी बुनियादी चीजें तक उपलब्ध नहीं हो रही हैं। ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू और वार्ड में इस्तेमाल होने वाला रोजमर्रा का सामान मुश्किल से मिल रहा है।
स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अस्पताल के हर विभाग ने ई-मेल से प्रबंधन को स्टॉक आउट की सूचना भेजी है। मरीजों के परिजन से डॉक्टरों ने सामान मंगवाया तो प्रबंधन ने आदेश जारी कर दिए कि बाहर से सामान न मंगवाया जाए।

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