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गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ कटनी के विजयराघवगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत*

गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ कटनी के विजयराघवगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत

कटनी, मध्य प्रदेश: गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई। यह पर्व भगवान गणेश के आगमन का प्रतीक है, जो विघ्नहर्ता और मंगलमूर्ति के रूप में हर मनोकामना को पूर्ण करते हैं। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के हृदयस्थल में बसे कटनी जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक समृद्धि को याद करना और भी प्रासंगिक हो जाता है, जहां विजयराघवगढ़ की गौरवशाली विरासत और भगवान गणेश का अनुपम मंदिर आज भी आस्था का केंद्र बना हुआ है।

*विजयराघवगढ़: एक ऐतिहासिक रियासत की स्थापना*
कटनी जिला, जो भौगोलिक दृष्टि से मध्य भारत का हृदय माना जाता है, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए विख्यात है। सन 1826 में मैहर के राजा दुर्जन सिंह जी के निधन के पश्चात उनके राज्य का बंटवारा हुआ। इस बंटवारे में प्राप्त एक भाग में राजा प्रयागदास जी ने अपने आराध्य भगवान श्रीराम की विजय की स्मृति में विजयराघवगढ़ नामक एक नई रियासत की स्थापना की। इस रियासत का नाम भगवान राम के विजयराघव स्वरूप के सम्मान में रखा गया, जो उनकी भक्ति और शासन की गौरवगाथा को दर्शाता है।

*विजयराघवगढ़ का कलात्मक दुर्ग और पचमठा गणेश मंदिर*
विजयराघवगढ़ में राजा प्रयागदास जी ने एक भव्य और कलात्मक दुर्ग का निर्माण करवाया, जिसमें भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर स्थापित किया गया। इस दुर्ग के निकट एक विशाल तालाब का निर्माण भी कराया गया, जिसके चारों कोनों पर मंदिर बनवाए गए। तालाब के मध्य में पचमठा नाम से प्रसिद्ध एक गणेश मंदिर का निर्माण हुआ, जो आज भी इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का प्रतीक है। इस मंदिर में काले पत्थर से निर्मित भगवान श्री गणेश की आदमकद प्रतिमा स्थापित है, जो अपनी मनोहर और आकर्षक शिल्पकला के लिए अद्वितीय मानी जाती है। यह प्रतिमा न केवल कला का उत्कृष्ट नमूना है, बल्कि भक्तों के लिए आस्था और श्रद्धा का केंद्र भी है।

*पचमठा गणेश मंदिर: आध्यात्मिकता और शिल्पकला का संगम*
पचमठा गणेश मंदिर विजयराघवगढ़ की धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मंदिर की स्थापना और काले पत्थर से निर्मित गणेश प्रतिमा की शिल्पकला इसे अन्य मंदिरों से विशिष्ट बनाती है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर यह मंदिर भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है। श्रद्धालु यहां भगवान गणेश के दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं। मंदिर का शांत और पवित्र वातावरण भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।

*गणेश चतुर्थी का महत्व और कटनी की सांस्कृतिक धरोहर*
गणेश चतुर्थी का पर्व न केवल भगवान गणेश की पूजा का अवसर है, बल्कि यह हमें हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जड़ों से भी जोड़ता है। कटनी जिले का विजयराघवगढ़ क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक रियासत, कलात्मक दुर्ग और पचमठा गणेश मंदिर के माध्यम से इस पर्व को और भी खास बनाता है। यह क्षेत्र न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह मध्य भारत की शिल्पकला, स्थापत्य और भक्ति परंपरा का भी जीवंत उदाहरण है।

*मंगलमूर्ति गणेश का आशीर्वाद*
इस गणेश चतुर्थी पर पचमठा गणेश मंदिर और विजयराघवगढ़ की यह ऐतिहासिक धरोहर हमें यह स्मरण कराती है कि हमारी सांस्कृतिक विरासत कितनी समृद्ध और प्रेरणादायी है। भगवान गणेश, जो विघ्नहर्ता और मंगलमूर्ति हैं, सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति प्रदान करें। आइए, इस पावन अवसर पर हम सब मिलकर अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजोएं और भगवान गणेश के आशीर्वाद से नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ें।

*मंगलमूर्ति सबका मंगल करें!*
गणेश चतुर्थी की पुनः शुभकामनाएं!

(नोट: यह समाचार लेख कटनी जिले की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को उजागर करने के साथ-साथ गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर आधारित है

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