केन नदी: कटनी से निकलकर बुंदेलखंड की जीवन रेखा बनी स्वच्छ नदी”

कटनी (मध्य प्रदेश), विशेष संवाददाता — मध्य प्रदेश की प्रमुख नदियों में शुमार केन नदी बुंदेलखंड क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाती है। यह यमुना की महत्वपूर्ण सहायक नदी है और भारत की सबसे स्वच्छ नदियों में से एक है, जो प्रदूषण से लगभग मुक्त रहती है।
केन नदी का उद्गम कटनी जिले की रीठी तहसील में अहिरगवां (Ahirgawan) गांव के निकट कैमूर (कैमूर) पहाड़ियों की उत्तर-पश्चिमी ढलानों से होता है। यह स्थान एक साधारण खेत की मेड या छोटी पहाड़ी से निकलता है, जहां से नदी प्रारंभ में संकरी धारा के रूप में बहना शुरू करती है। ऊंचाई लगभग 550 मीटर है।
यहाँ केन नदी के उद्गम के कुछ मनोरम दृश्य:
प्रवाह और लंबाई

केन नदी की कुल लंबाई 427 किलोमीटर है। इसमें से 292 किमी मध्य प्रदेश (कटनी, पन्ना, छतरपुर आदि जिलों से), 84 किमी उत्तर प्रदेश में और 51 किमी दोनों राज्यों की सीमा पर बहती है। पन्ना राष्ट्रीय उद्यान से गुजरते हुए नदी का प्रवाह तेज हो जाता है, जहां यह 60 किमी लंबी और 150-180 मीटर गहरी भव्य घाटी बनाती है।
इस घाटी में रानेह जलप्रपात सबसे प्रमुख आकर्षण है, जो रंग-बिरंगी चट्टानों और प्राकृतिक सौंदर्य से युक्त है:
संगम
केन नदी उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में चिल्ला घाट पर यमुना नदी में मिलती है।
अनोखा रहस्य: शजर पत्थर
केन नदी का सबसे बड़ा आकर्षण है शजर पत्थर (Shajar Stone)। यह दुर्लभ पत्थर लाखों वर्ष पुराने जीवाश्मों से बना होता है, जिसे तराशने पर पेड़, झाड़ियां, पशु-पक्षी जैसी प्राकृतिक आकृतियां उभर आती हैं। पन्ना से बांदा तक मुख्य रूप से पाया जाता है और विश्व प्रसिद्ध है। इससे आभूषण, सजावटी वस्तुएं बनाई जाती हैं:

पर्यावरणीय महत्व
नदी पन्ना टाइगर रिजर्व से होकर बहती है, जहां समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीवों का निवास है। यह मध्य प्रदेश की एकमात्र प्रमुख नदी है जो ज्यादातर प्रदूषण मुक्त बनी हुई है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना
बुंदेलखंड के जल संकट को दूर करने के लिए केन-बेतवा लिंक परियोजना महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री द्वारा आधारशिला रखी गई इस परियोजना से लाखों हेक्टेयर भूमि में सिंचाई और पेयजल की सुविधा मिलेगी।
केन नदी की घाटियां, जलप्रपात और शांत प्रवाह इसे प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग बनाते हैं। कटनी के एक साधारण खेत से निकलकर यमुना तक पहुंचने वाला यह सफर वाकई अनोखा और प्रेरणादायक है।
(सभी तस्वीरें विभिन्न स्रोतों से संग्रहित, सौजन्य: विभिन्न पर्यटन एवं पर्यावरण वेबसाइट्स)

















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