सत्यार्थ न्यूज वरिष्ठ पत्रकार हरिकृष्ण शुक्ल उन्नाव उत्तर प्रदेश
उन्नाव में ट्रैक्टर ट्राली पलटने से एक मजदूर की मौत, परिवार में मचा कोहराम

उन्नाव (माखी): एक दर्दनाक हादसे ने एक परिवार की खुशियाँ छीन लीं। माखी थाना क्षेत्र के पेसारी गांव के पास रविवार दोपहर को एक ट्रैक्टर ट्राली पलटने से जुबैर अली (40) नामक मजदूर की मौत हो गई, जबकि उनके साथी बबलू (25) को मामूली चोटें आई हैं। जुबैर अली का परिवार अब इस दुखद घटना में गहरे शोक में डूबा हुआ है।
हादसे का दिल दहलाने वाला वृतांत
फतेहपुर चौरासी के मोती नगर निवासी जुबैर अली और बबलू रविवार को कुशैला गांव से इंटरलॉकिंग ईंट लेकर पेसारी गांव गए थे। ईंट उतारने के बाद वे वापस लौट रहे थे, जब लखनऊ-बांगरमऊ संपर्क मार्ग पर ट्रैक्टर ट्राली अनियंत्रित होकर पलट गई। ट्रैक्टर के नीचे दबे जुबैर अली की दर्दनाक मौत हो गई।
हादसे के बाद आसपास के ग्रामीणों ने तुरंत ट्रैक्टर को हटाया और जुबैर अली को मियागंज सीएचसी पहुंचाया। लेकिन डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने उनके परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया।
परिवार की स्थिति – ममता की मूरत का दिल दहला देने वाला ग़म
जुबैर अली की पत्नी महनूर, माँ नसीमुन और चार बच्चों की आँखों में आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। जुबैर अली की दो बेटियाँ मुस्कान (19), सकीना (17) और दो बेटे जैद (15), अलमतस (12) की आँखों में अपने पिता को खोने का ग़म समाया है।
महनूर, जो हर रोज़ अपने पति के साथ घर की जिम्मेदारियों का भार साझा करती थीं, अब अकेले ही बच्चों की परवरिश की चिंता में डूब चुकी हैं। बच्चों के मासूम सवालों के सामने उनका दिल चुरता जा रहा है।
समाज के लिए एक सवाल
यह हादसा केवल एक मजदूर की मौत नहीं है, बल्कि यह उस वर्ग की खामोशी और मेहनत का एक और उदाहरण है, जो बिना किसी सुरक्षा के दिन-रात मेहनत करता है, अपनी जवानी और जिंदगी को परिवार की भलाई के लिए दांव पर लगा देता है। जुबैर के परिवार को, जो एक मेहनतकश जीवन जी रहे थे, अब उनकी अभी भी टूटी हुई आशाओं का सामना करना है।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
आसीवन थाना प्रभारी निरीक्षक अरविंद कुमार पांडेय ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है।
यह घटना न केवल जुबैर अली के परिवार की त्रासदी है, बल्कि यह समाज में खतरनाक कामकाजी स्थितियों और मजदूरों की सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीर सवाल भी उठाती है। सरकार और प्रशासन से मजदूरों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा की जरूरत आज पहले से कहीं अधिक महसूस हो रही है।

















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