Advertisement

कटनी माइनिंग कांक्लेव: निवेशकों को भरोसा, माफियाओं पर लगाम और किसानों को न्याय की उम्मीद*

कटनी माइनिंग कांक्लेव: निवेशकों को भरोसा, माफियाओं पर लगाम और किसानों को न्याय की उम्मीद

हरिशंकर पाराशर सत्यार्थ न्यूज़ संवाददाता

*कटनी।* 23 अगस्त को कटनी में आयोजित होने वाली माइनिंग कांक्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को निवेशकों को यह भरोसा दिलाना होगा कि अफसरशाही और माफिया राज उद्योगों के लिए बाधा नहीं बनेगा। अन्यथा, सांघी सीमेंट और वेल्सपन एनर्जी जैसे बड़े उद्यमों की विफलता का इतिहास दोहराया जाएगा। जिले में खनन और उद्योगों की बदहाली, अवैध खनन, और किसानों के दोहरे नुकसान ने औद्योगिक विकास की राह में गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

*किसानों का दोहरा नुकसान: न मुआवजा, न रोजगार*
विजयराघवगढ़ क्षेत्र में सांघी सीमेंट, वेल्सपन एनर्जी और एसीसी अडानी समूह जैसे बड़े उद्योगों को हजारों हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई, लेकिन उद्योग स्थापित नहीं हुए। भूमि अधिग्रहण के बावजूद विस्थापित किसानों को न तो उचित मुआवजा मिला और न ही रोजगार के अवसर। इससे स्थानीय किसानों की मुश्किलें बढ़ीं, और स्टोन पार्क जैसी योजनाएं भी धराशायी हो गईं। वेल्सपन एनर्जी ने कोल आवंटन की केंद्रीय नीतियों के अभाव में परियोजना छोड़ दी, तो सांघी सीमेंट ने जमीन बेचकर मुनाफा कमाया।

*माफिया और अफसरशाही का गठजोड़: अरबों की राजस्व चोरी*
कटनी का रेत खनन उद्योग माफियाओं के कब्जे में है। बीते दस वर्षों में नदियों से अवैध रेत उत्खनन ने पर्यावरणीय नियमों को ताक पर रखा और शासन को अरबों रुपये के राजस्व से वंचित किया। विजयराघवगढ़ और मैहर सीमा क्षेत्र में चूना पत्थर का अवैध खनन भी माफिया और खनिज, वन, राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से फल-फूल रहा है। पर्यावरण विभाग पर भी नियमों की अनदेखी के आरोप हैं।

*चूना उद्योग की बदहाली, लघु उद्योगों का टोटा*
कटनी की पहचान रहे चूना उद्योग का 90% हिस्सा आज मृतप्राय है। विजयराघवगढ़ के गोइंद्रा में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा रखी गई लघु उद्योग की आधारशिला भी विस्मृति में खो गई। जिले में लौह अयस्क, चूना पत्थर, बॉक्साइट, तांबा, डोलोमाइट जैसे खनिजों की प्रचुरता के बावजूद नीतिगत कमियों और अव्यवस्थाओं ने औद्योगिकीकरण को ठप कर रखा है।

*पत्रकार की चेतावनी, सीएम से अपेक्षाएं*
पत्रकार सुरेंद्र दुबे का कहना है कि जब तक प्रशासन माफियाओं के चंगुल से मुक्त नहीं होगा, कटनी का औद्योगिक विकास असंभव है। मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति के साथ कटनी मध्यप्रदेश का अग्रणी राजस्वदाता जिला बन सकता है। मुख्यमंत्री से मांग है कि:
– उद्योगों को आवंटित भूमि के उपयोग की समीक्षा हो।
– विस्थापित परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास नीतियां लागू हों।
– अवैध खनन और राजस्व चोरी पर कठोर कार्रवाई हो।
– निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल बनाया जाए।

*कटनी की खनिज संपदा को समृद्धि का आधार बनाएं*
कटनी में खनिज संपदा की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन माफिया-अफसरशाही की सांठगांठ और नीतिगत कमियों ने जिले को औद्योगिक पिछड़ेपन में धकेल दिया। माइनिंग कांक्लेव में मुख्यमंत्री और प्रशासन के पास यह सुनहरा अवसर है कि वे निवेशकों को भरोसा, किसानों को न्याय और माफियाओं पर लगाम लगाकर कटनी को आर्थिक समृद्धि की राह पर ले जाएं।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!