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उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: 33 सांसदों की बगावत का दावा, इंडिया गठबंधन का 60% वोट का दावा, नायडू की भूमिका पर सस्पेंस

उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: 33 सांसदों की बगावत का दावा, इंडिया गठबंधन का 60% वोट का दावा, नायडू की भूमिका पर सस्पेंस

लेखक: हरिशंकर पाराशर

नई दिल्ली, 21 अगस्त 2025: भारत के उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 ने राजनीतिक परिदृश्य में भूचाल ला दिया है। विपक्षी इंडिया गठबंधन के एक सनसनीखेज दावे ने सत्तारूढ़ एनडीए की रणनीति को चुनौती दी है। इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार ने दावा किया है कि उनके पास 60% वोटों का समर्थन है और एनडीए के 33 सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बगावत कर सकते हैं। इस बीच, तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू के सांसदों की भूमिका को लेकर अटकलें चरम पर हैं। क्या नायडू के सांसद एनडीए का साथ देंगे या विपक्ष की ओर झुकेंगे? यह सवाल भारतीय राजनीति में तूफान खड़ा कर रहा है।
चुनाव का गणित और पृष्ठभूमि
उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर 2025 को होगा, और नामांकन प्रक्रिया 7 अगस्त से शुरू हो चुकी है। भारतीय निर्वाचन आयोग के अनुसार, लोकसभा और राज्यसभा के कुल 782 सांसद इस चुनाव में मतदान करेंगे। जीत के लिए 392 वोटों की आवश्यकता है। एनडीए के पास वर्तमान में 422 सांसदों (लोकसभा में 293 और राज्यसभा में 129) का समर्थन है, जो बहुमत से अधिक है। दूसरी ओर, इंडिया गठबंधन के पास 312 सांसद और अन्य दलों के पास 43 सांसद हैं।
एनडीए ने सीपी राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि इंडिया गठबंधन ने बी. सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा है। गुप्त मतदान और व्हिप की अनुपस्थिति ने क्रॉस वोटिंग की संभावना को बढ़ा दिया है, जिससे यह चुनाव अप्रत्याशित मोड़ ले सकता है।
इंडिया गठबंधन का 60% वोट का दावा
इंडिया गठबंधन के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया है कि उनके पास 469 वोटों (60%) का समर्थन है, जो जीत के लिए आवश्यक 392 वोटों से काफी अधिक है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि एनडीए के 33 सांसद, जो कथित तौर पर बीजेपी नेतृत्व और प्रधानमंत्री मोदी से असंतुष्ट हैं, इंडिया गठबंधन के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं, और इसे विपक्ष की रणनीतिक चाल के रूप में भी देखा जा रहा है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए इंडिया गठबंधन के नेताओं के साथ एक रात्रिभोज का आयोजन किया, जहां उपराष्ट्रपति चुनाव की रणनीति पर गहन चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष इस चुनाव को 2024 के लोकसभा चुनावों में एनडीए की जीत के बाद अपनी ताकत प्रदर्शित करने के अवसर के रूप में देख रहा है।
नायडू और टीडीपी की भूमिका
टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू, जिनके पास लोकसभा और राज्यसभा में कुल 18 सांसद हैं, इस चुनाव में किंगमेकर की भूमिका में हो सकते हैं। विपक्षी खेमे में यह चर्चा जोरों पर है कि नायडू के कुछ सांसद एनडीए के खिलाफ क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। इस तरह की अटकलों को तब बल मिला जब विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि टीडीपी और जेडीयू जैसे सहयोगी दलों के सांसदों में असंतोष की स्थिति है।
हालांकि, नायडू ने स्पष्ट किया है कि टीडीपी एनडीए के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने सीपी राधाकृष्णन को समर्थन देने की घोषणा की और इसे “राष्ट्रसेवा का संकल्प” बताया। फिर भी, गुप्त मतदान की प्रक्रिया के कारण क्रॉस वोटिंग की संभावना बनी हुई है।
एनडीए का जवाब और रणनीति
एनडीए ने विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए इसे “हताशा का परिणाम” करार दिया है। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, “हमारे पास पूर्ण समर्थन है, और हम विपक्ष के साथ बातचीत कर निर्विरोध चुनाव सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे।” केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सीपी राधाकृष्णन को समर्थन जताया और सहयोगी दलों से एकजुटता का आह्वान किया। जेडीयू, शिवसेना, और अन्य सहयोगी दलों ने भी एनडीए के प्रति अपनी वफादारी दोहराई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान में कहा, “उपराष्ट्रपति चुनाव में हमारा उद्देश्य एक मजबूत और एकजुट भारत का निर्माण करना है। हमारे उम्मीदवार को सभी सहयोगी दलों का समर्थन प्राप्त है, और हमें जनता का विश्वास हासिल है।”
गुप्त मतदान की प्रक्रिया
उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान बैलेट पेपर और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम के जरिए होगा। विशेष पेन का उपयोग अनिवार्य है, और गलत पेन के इस्तेमाल से वोट रद्द हो सकता है। व्हिप लागू न होने के कारण सांसद स्वतंत्र रूप से मतदान कर सकते हैं, जिससे क्रॉस वोटिंग की संभावना बढ़ जाती है। मतदान 9 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होगा, और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे।
विश्लेषकों का दृष्टिकोण
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इंडिया गठबंधन का 60% वोट का दावा अतिशयोक्तिपूर्ण हो सकता है, लेकिन क्रॉस वोटिंग की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संजय कुमार कहते हैं, “गुप्त मतदान और व्हिप की अनुपस्थिति इस चुनाव को अनिश्चित बनाती है। यदि टीडीपी या जेडीयू जैसे सहयोगी दलों में असंतोष है, तो यह एनडीए के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है।”
निष्कर्ष
उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 अब केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच शक्ति प्रदर्शन का मैदान बन गया है। इंडिया गठबंधन के 60% वोट और 33 सांसदों की बगावत के दावे ने इस चुनाव में नाटकीय मोड़ ला दिया है। नायडू और नीतीश जैसे सहयोगी दलों की भूमिका परिणाम को निर्धारित करेगी। 9 सितंबर को यह स्पष्ट हो जाएगा कि क्या एनडीए के सांसद वाकई में मोदी को “धोखा” देंगे या गठबंधन की एकजुटता कायम रहेगी।

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