मध्य प्रदेश का कर्ज बोझ: 2023-25 में 1 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज, विकास या आर्थिक संकट?
सत्यार्थ न्यूज़ संवाददाता

*भोपाल, 27 जुलाई 2025: मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023 से 2025 तक विभिन्न स्रोतों से लगभग **1,01,208 करोड़ रुपये* का कर्ज लिया है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से लोक-कल्याणकारी योजनाओं जैसे लाड़ली बहना योजना, बिजली सब्सिडी और बुनियादी ढांचा विकास पर किया जा रहा है। वर्तमान में राज्य का कुल कर्ज *3.75 लाख करोड़ रुपये* से अधिक हो चुका है, जो 4 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच रहा है। यह जानकारी विभिन्न समाचार स्रोतों और उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है।
*2023-24: कर्ज में भारी वृद्धि*
वित्तीय वर्ष 2023-24 में मध्य प्रदेश सरकार ने *55,708 करोड़ रुपये* का कर्ज लिया। इस कर्ज का बड़ा हिस्सा खुले बाजार से गवर्नमेंट सिक्युरिटीज के माध्यम से लिया गया, जिसका प्रबंधन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ई-कुबेर प्रणाली के जरिए हुआ। इसके अलावा, केंद्र सरकार और वित्तीय संस्थानों से भी कर्ज लिया गया। जनवरी 2023 में 2,000 करोड़ रुपये, फरवरी में 12,000 करोड़ रुपये, और मार्च में 10,000 करोड़ रुपये सहित कई चरणों में कर्ज लिया गया। सितंबर और अक्टूबर 2023 में क्रमशः 4,500 करोड़ और 4,000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया, जो विधानसभा चुनाव और लाड़ली बहना योजना के लिए उपयोग हुआ। 31 मार्च 2024 तक कुल कर्ज *3,85,000 करोड़ रुपये* तक पहुंचने का अनुमान था।
### *2024-25: कर्ज का सिलसिला जारी*
वित्तीय वर्ष 2024-25 में अब तक सरकार ने *45,500 करोड़ रुपये* का कर्ज लिया है। इसमें से *73,540 करोड़ रुपये* बाजार से और *15,000 करोड़ रुपये* केंद्र सरकार से लिए गए। अगस्त 2024 में 10,000 करोड़ रुपये, नवंबर में 5,000 करोड़ रुपये, और दिसंबर में 5,000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया। जनवरी 2025 में 5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज लिया गया, जो 13 और 22 वर्षों में चुकाया जाएगा। वर्तमान में कुल कर्ज *3.75 लाख करोड़ रुपये* से अधिक है, जो प्रति व्यक्ति *50,000 रुपये* के कर्ज के बराबर है।
*कर्ज के स्रोत और चुकौती*
मध्य प्रदेश का कुल कर्ज विभिन्न स्रोतों से लिया गया है:
– *बाजार से कर्ज*: 2,03,000 करोड़ रुपये
– *केंद्र सरकार से कर्ज*: 62,012 करोड़ रुपये
– *वित्तीय संस्थानों से कर्ज*: 15,248 करोड़ रुपये

कर्ज की चुकौती अवधि 4 से 22 वर्ष तक है। उदाहरण के लिए, नवंबर 2024 में लिया गया 5,000 करोड़ रुपये का कर्ज 14 और 20 वर्षों में, जबकि जनवरी 2025 का कर्ज 2038 और 2047 तक चुकाया जाएगा। सरकार प्रतिवर्ष *20,000 करोड़ रुपये* केवल ब्याज भुगतान पर खर्च कर रही है।
### *कर्ज का उपयोग*
कर्ज का उपयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में हो रहा है:
– *लाड़ली बहना योजना*: प्रतिवर्ष 18,000 करोड़ रुपये, जिसमें 1.29 करोड़ महिलाओं को 1,250 रुपये मासिक दिए जा रहे हैं।
– *बिजली सब्सिडी*: 100 यूनिट बिजली खपत पर 100 रुपये मासिक की दर से 5,500 करोड़ रुपये खर्च।
– *वेतन और भत्ते*: 2023-24 में 82,338 करोड़ रुपये।
– *अन्य योजनाएं*: लाड़ली लक्ष्मी, तीर्थ दर्शन, और रामपथ गमन जैसी योजनाओं पर खर्च।
– *बुनियादी ढांचा*: सड़क, बांध, और अन्य विकास कार्यों पर निवेश।
### *वित्तीय स्थिति और विवाद*
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा का दावा है कि कर्ज RBI की गाइडलाइंस के अनुसार लिया जा रहा है और इसका उपयोग विकास के लिए हो रहा है। हालांकि, विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर मुफ्त योजनाओं के लिए अंधाधुंध कर्ज लेने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इससे प्रत्येक नवजात पर 50,000 रुपये का कर्ज पड़ रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की आय (2.52 लाख करोड़ रुपये) और खर्च (2.51 लाख करोड़ रुपये) में संतुलन की कमी के कारण कर्ज आवश्यक हो गया है। यदि आय के स्रोत नहीं बढ़े, तो यह दीर्घकालिक आर्थिक बोझ बन सकता है।
### *आगे की राह*
वित्तीय वर्ष 2024-25 में सरकार ने *88,450 करोड़ रुपये* का कर्ज लेने की योजना बनाई है। यदि यह लक्ष्य पूरा होता है, तो मार्च 2025 तक कुल कर्ज *5 लाख करोड़ रुपये* को पार कर सकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को कर्ज पर निर्भरता कम करने के लिए राजस्व बढ़ाने और आर्थिक सुधारों पर ध्यान देना होगा।
*निष्कर्ष*: मध्य प्रदेश का बढ़ता कर्ज विकास और जनकल्याण के लिए जरूरी माना जा रहा है, लेकिन इसका दीर्घकालिक प्रभाव राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस जारी है, और जनता की नजर अब भविष्य की आर्थिक नीतियों पर टिकी है।
















Leave a Reply