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ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना ने रचना को बनाया आत्मनिर्भर: मिठाई व्यवसाय से बढ़ी आजीविका

पारुल राठौर हरिद्वार

ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना ने रचना को बनाया आत्मनिर्भर: मिठाई व्यवसाय से बढ़ी आजीविका


मुख्य विकास अधिकारी हरिद्वार श्रीमती आकांक्षा कोण्डे के निर्देशों के क्रम में जनपद हरिद्वार के समस्त विकासखंडों में अल्ट्रा पुअर सपोर्ट, एंटरप्राइजेज (फॉर्म एवं नॉन-फॉर्म) तथा सीबीओ स्तर के उद्यमों की स्थापना की जा रही है। इसी कड़ी में ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सहयोग से रुड़की विकासखंड के करोंदी गांव की श्रीमती रचना, पत्नी श्री धर्मपाल, ने अपने मिठाई व्यवसाय को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है।

श्रीमती रचना, शिरोमणि समूह की सक्रिय सदस्य हैं और आस्था सीएलएफ से जुड़ी हुई हैं। प्रारंभ में वे सीमित संसाधनों के साथ मिठाई निर्माण का कार्य करती थीं, जिससे उनकी मासिक आय ₹5000–₹7000 तक सीमित थी। ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना की टीम ने उनके व्यवसाय की संभावनाएं पहचानीं और उन्हें बड़े स्तर पर कार्य विस्तार हेतु प्रेरित किया।

परियोजना से मिले सहयोग के अंतर्गत उन्हें कुल ₹77,625 की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई, जिसमें ₹17,625 लाभार्थी अंश, ₹22,500 परियोजना अनुदान और ₹37,500 का बैंक ऋण शामिल है।

इस आर्थिक सहयोग से श्रीमती रचना ने अपने व्यवसाय को विस्तारित किया और अब उनकी मासिक आमदनी ₹10,000–₹12,000 तक पहुँच गई है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि वे अपने परिवार को बेहतर जीवन स्तर प्रदान कर पा रही हैं।

श्रीमती रचना की यह सफलता ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना, उत्तराखण्ड ग्राम्य विकास समिति, और जिला प्रशासन हरिद्वार के सहयोगात्मक प्रयासों का सजीव उदाहरण है।

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