अगले दो महीने में भारत की सियासत में बड़ा बदलाव? प्रधानमंत्री और संघ प्रमुख की कुर्सी पर नई चर्चा
सत्यार्थ न्यूज़ संवाददाता

भोपाल, 11 जुलाई 2025*: भारतीय राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान ने सियासी गलियारों में तूफान ला दिया है। भागवत ने नागपुर में एक कार्यक्रम में कहा कि “75 साल की उम्र के बाद नेताओं को रिटायर होकर नई पीढ़ी को मौका देना चाहिए।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब सितंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वयं मोहन भागवत दोनों 75 साल के हो जाएंगे। इस बयान के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या अगले दो महीनों में भारत के दो सबसे प्रभावशाली पदों—प्रधानमंत्री और संघ प्रमुख—में बदलाव देखने को मिलेगा?
भागवत का बयान: संकेत या संयोग?
मोहन भागवत का यह बयान कोई सामान्य टिप्पणी नहीं है। RSS, जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) का वैचारिक मार्गदर्शक संगठन माना जाता है, के प्रमुख की यह बात सीधे तौर पर नेतृत्व परिवर्तन की ओर इशारा करती है। खासतौर पर तब, जब यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पांच देशों की विदेश यात्रा से लौटने के तुरंत बाद आया है।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस बयान को तुरंत लपक लिया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा, “प्रधानमंत्री के लिए यह कैसी घर वापसी है कि सरसंघचालक ने उन्हें रिटायरमेंट की याद दिला दी। लेकिन सवाल यह है कि क्या भागवत खुद अपनी सलाह पर अमल करेंगे, क्योंकि वह भी 11 सितंबर को 75 साल के हो जाएंगे।” विपक्षी नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी टिप्पणी की कि यह “BJP और RSS के बीच का पारिवारिक मामला है, जिसमें हमें दखल नहीं देना चाहिए।”
BJP में राष्ट्रीय अध्यक्ष का सवाल
इसी बीच, BJP में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन को लेकर भी चर्चाएं गर्म हैं। मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल जनवरी 2023 में ही समाप्त हो चुका था, जिसे 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए जून तक बढ़ाया गया था। अब पार्टी जल्द ही नए अध्यक्ष की घोषणा करने वाली है। सूत्रों के मुताबिक, RSS ने नए अध्यक्ष के लिए कुछ मानदंड तय किए हैं, जिनमें जमीनी स्तर पर काम करने वाला नेता, सुलभ व्यक्तित्व और 60 साल से अधिक उम्र शामिल है।
चर्चा है कि नए अध्यक्ष का चयन 21 जुलाई तक हो सकता है। कुछ नामों में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और तमिलनाडु की नेता वनाथी श्रीनिवासन का नाम सामने आ रहा है। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि पहली बार BJP को महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या नया अध्यक्ष पूरी तरह RSS की पसंद होगा, या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह अपनी पसंद थोप पाएंगे?
क्या कहते हैं सियासी जानकार?
सियासी विश्लेषकों का मानना है कि RSS और BJP के बीच नेतृत्व को लेकर पहले भी तनाव की खबरें सामने आई हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों संगठनों के बीच कुछ दूरी दिखी थी, जिसका असर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में BJP के प्रदर्शन पर पड़ा। भागवत का बयान इस दूरी को और गहरा सकता है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान न केवल BJP के लिए बल्कि RSS के आंतरिक ढांचे में भी बदलाव का संकेत हो सकता है।
X पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस छिड़ी हुई है। एक यूजर ने लिखा, “संघ प्रमुख और प्रधानमंत्री में अंदर-अंदर ठनी हुई है। BJP अब संघ से ऊपर निकल चुकी है, और यही RSS की मजबूरी बन गई है।” एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया, “क्या मोदी भागवत की सलाह मानकर इस्तीफा देंगे, या कुर्सी से चिपके रहेंगे?”
क्या होगा अगले दो महीने में?
हालांकि, अगले दो महीनों में प्रधानमंत्री और संघ प्रमुख दोनों के बदलने की संभावना फिलहाल कम लग रही है। नरेंद्र मोदी का BJP और देश की राजनीति में दबदबा अभी भी बरकरार है। उनके नेतृत्व में BJP ने कई राज्यों में जीत हासिल की है, और उनकी विदेश नीति को वैश्विक स्तर पर सराहना मिल रही है। दूसरी ओर, RSS में भी मोहन भागवत का प्रभाव कम नहीं है। उनके बयान को सियासी हलकों में एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन क्या यह संदेश दोनों नेताओं के रिटायरमेंट की ओर इशारा करता है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
कुछ जानकारों का मानना है कि अगर बदलाव होता है, तो यह BJP के संगठनात्मक ढांचे तक सीमित रह सकता है, जैसे कि नया राष्ट्रीय अध्यक्ष या कुछ राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति। लेकिन प्रधानमंत्री पद पर बदलाव के लिए अभी कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं।
विपक्ष का रुख
विपक्ष इस मौके को भुनाने में जुट गया है। कांग्रेस ने RSS और BJP पर संविधान विरोधी होने का आरोप लगाया है, और भागवत के बयान को मोदी के खिलाफ एक “संघ-संकेत” करार दिया है। कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने तो यहां तक कह दिया कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई, तो RSS पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।
अगले दो महीने भारतीय राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। RSS और BJP के बीच नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान, नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन, और भागवत के बयान से उपजा सियासी तूफान—ये सब मिलकर एक नया सियासी समीकरण बना सकते हैं। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि प्रधानमंत्री और संघ प्रमुख दोनों बदल जाएंगे। लेकिन इतना तय है कि सितंबर 2025 तक देश की नजरें इन दो दिग्गजों पर टिकी रहेंगी। क्या यह बयान सिर्फ एक सलाह है, या सियासत में बड़े बदलाव का प्रस्थान बिंदु? यह वक्त ही बताएगा।
















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