संवाददाता:-हर्षल रावल
सिरोही/राज.
सोशल मीडिया भारत के युवाओं को खोखला कर रहा है- भारत विरोधी शक्ति फैला रही हैं भ्रम और नफरत

सिरोही। आज का युवा वर्ग सोशल मीडिया के चकाचौंध में ऐसा उलझ गया है कि उसका वास्तविक जीवन कहीं पीछे छूट गया है।
फेसबुक, इंस्टाग्राम, X और अब तो छोटे वीडियो वाले ऐप्स पर दिनभर समय बिताना आम बात हो गई है। सोशल मीडिया की लत अब केवल टाइम पास नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुकी है।
सोशल मीडिया का उपयोग जब सीमित और सोच-समझ कर किया जाए, तो यह जानकारी का माध्यम बन सकता है। लेकिन आज जो हो रहा है, वह एक अलग ही कहानी है। सोशल मीडिया अब कुछ लोगों के लिए दूसरों को फंसाने, बदनाम करने और मानसिक रूप से तोड़ने का ज़रिया बन गया है। अधिकांश देखा गया है कि कुछ लोग फेक अकाउंट बनाकर किसी की छवि को खराब करने का प्रयास करते हैं।

किसी लड़की की तस्वीरों को एडिट कर वायरल कर देना या फिर किसी लड़के का नाम जोड़कर झूठे स्कैंडल बनाना अब आम हो गया है। ये लोग न तो किसी के भविष्य की परवाह करते हैं, न ही किसी की भावनाओं की। और अफसोस की बात यह है कि इन हरकतों के पीछे कई बार ऐसे लोग होते हैं जो भारत विरोधी एजेंडे से जुड़े होते हैं। सोशल मीडिया पर उपस्थित कुछ कम्युनिस्ट विचारधारा वाले लोग और अन्य राष्ट्रविरोधी समूह लगातार भारत के विरुद्ध नफरत फैलाने में जुटे हैं।
ये लोग फेक न्यूज फैलाते हैं, सेना और सरकार को बदनाम करने का प्रयास करते हैं और धर्म के नाम पर लोगों को भड़काते हैं। इनका उद्देश्य साफ है भारत को अंदर से कमजोर करना। ऐसे लोग खासतौर पर युवाओं को निशाना बनाते हैं। उन्हें गलत जानकारी देकर भटकाते हैं। कुछ ग्राफिक्स और चौंकाने वाले आंकड़ों के ज़रिए यह जताते हैं कि भारत में कुछ भी सही नहीं हो रहा।
जब युवा इन बातों को सत्य मान लेते हैं, तब उनका विश्वास अपने देश से डगमगाने लगता है। दिनभर सोशल मीडिया पर वक्त बिताने से न केवल आंखों और शरीर पर प्रभाव होता है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।

युवा स्वयं की तुलना दूसरों से करने लगते हैं, जो डिप्रेशन और हीनभावना को जन्म देता है। लाइक और फॉलोअर्स की गिनती ने युवाओं को अपनी वास्तविक पहचान से दूर कर दिया है।
आज कल सोशल मीडिया अपराधियों के लिए भी एक नया प्लेटफॉर्म बन चुका है। कई मामले सामने आए हैं, जहां लोग सोशल मीडिया पर मित्रता कर के ब्लैकमेल करते हैं। अश्लील चैट, वीडियो कॉल और फिर उनका स्क्रीनशॉट लेकर पैसे की मांग या बदनाम करने की धमकी देना अब एक सामान्य तरीका बन गया है।
सरकार और साइबर एजेंसियां अपने स्तर पर कार्य कर रही हैं, लेकिन वास्तविक बदलाव तब आएगा जब युवा स्वयं जागरूक होंगे।
उन्हें यह समझना होगा कि प्रत्येक पोस्ट, प्रत्येक समाचार सत्य नहीं होती। कोई भी जानकारी शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई जांचना आवश्यक है। माता-पिता को भी बच्चों पर दृष्टि रखनी होगी। उन्हें यह समझाना होगा कि सोशल मीडिया केवल मनोरंजन या जानकारी का साधन है, जीवन नहीं।

विशेष रूप से भारत जैसे देश में जहां युवा आबादी सबसे अधिक है, वहां यह एक गंभीर खतरा बन चुका है। यदि अब भी हमने ध्यान नहीं दिया, तो हमारे युवा मानसिक, सामाजिक और वैचारिक रूप से कमजोर हो जाएंगे।
यह वह स्थिति होगी, जहां शत्रु बिना हथियार के हमें अंदर से तोड़ देगा। समय है जागने का, सतर्क रहने का और सोशल मीडिया का सही प्रकार से उपयोग करने का।
माता-पिता को अपने बच्चों का मुख्य ध्यान रखें कि वह सोशल मीडिया का कितना उपयोग कर रहा हैं। समय-समय पर उसका मोबाइल चेक करना आवश्यक है। आजकल लड़कियां इंस्ट्राग्राम का अधिक उपयोग कर रही है और अपना भविष्य खतरे में ले जा रही।


















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