रिपोर्टर:-अजय कुमार रजक
जिला:-गिरिडीह
अनुमंडल:-डुमरी
बाल विवाह उन्मूलन अभियान को लेकर चलाया गया जागरूकता अभियान
डुमरी:बाल विवाह महज़ एक सामाजिक कुरीति नहीं अपितु यह एक जघन्य अपराध है।बाल विवाह का शिकार बचपन अपने बालपन के अधिकार को खो चूका होता है।बाल विवाह मुक्त भारत अभियान से जुड़े स्वंसेवक मंदिरों तथा मस्जिदो में जाकर पंडितों, पुरोहितों और मौलानाओं को जागरूक कर रहे हैं। उन्हें बताया जा रहा है कि अगर उम्र का वेरिफिकेशन किये बिना बाल विवाह कराते हैं तो बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत आपको दो लाख जुर्माना और एक साल की सजा हो सकती है।इसी क्रम में
गुरुवार को बगोदर के हरिहर धाम मंदिर में पोस्टर लगाया गया जिससे कि अनजाने में भी पुरोहित गलती करने से बचें।बताया गया कि उम्र को प्रमाणित करने के लिए चार तरीके हैं,जन्म प्रामाण पत्र,स्कूल के नामांकन पंजी में दर्ज़ जन्म तिथि,आंगनबाड़ी केंद्र में दर्ज़ बच्चा कार्ड में अंकित जन्म तिथि तथा अगर इन तीनों में कोई दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं है तो मेडिकल सर्टिफिकेट।आधार कार्ड में अंकित जन्म तिथि मान्य नहीं है।बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की सहभागी संस्था बनवासी विकास आश्रम गिरिडीह के सचिव सुरेश कुमार शक्ति ने कहा कि गिरिडीह जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने मे आवश्यक है कि विभिन्न सरकारी विभाग,संस्थान,बैधानिक निकाय और नागर समाज से जुड़े संगठन एक समग्र और समन्वित दृष्टिकोण के साथ काम करे।हमारा उद्देश्य लक्षित हस्तक्षेपों के जरिये बाल विवाह के खात्मे की प्रक्रिया को तेज करना है।श्री शक्ति ने कहा कि अभी तक 450 बच्चों का बाल विवाह उनके माता-पिता से अंडरटेकिंग पर हस्ताक्षर करवा कर रोका गया है तथा 4 एफआईआर दर्ज की गई है एवं 211000 लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलववाया गया है।4 बच्चियों को मानव तस्करी व 21 बच्चों को बाल मजदूरी से बचाया गया है साथ ही 17 बाल यौन शौषण से पीड़ित बच्चियों को संस्था द्वारा कानूनी सहायता, काउंसलिंग एवं मेंटल हेल्थ की सहायता दी जा रही है।न्याय ताक पहुंच परियोजना के जिला समन्वयक उत्तम कुमार ने कहा कि बाल विवाह एक गंभीर चिंता है जो समाज को बुरी तरह से प्रभावित करती है और विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां ऐसी प्रथा चिंताजनक रूप से उच्च हैं जैसे कि झारखंड। बाल विवाह एक संगीन अपराध के साथ एक चिंता का विषय भी है।आज झारखंड राज्य पूरे भारत वर्ष में बाल विवाह के मामले में तीसरे स्थान पर है और गिरिडीह जिला चौथे स्थान पर है।बाल विवाह के तमाम कारण है जैसे पुरानी प्रथा,गरीबी, बच्चियों के लिए असुरक्षित माहोल,शिक्षा का अभाव, सामाजिक दबाव अन्य ढेर सारे कारण है।इस दौरान
मंदिर,मस्जिद जागरूकता अभियान के ओमप्रकाश महतो,भागीरथी देवी,यशोदा देवी,महेंद्र कुमार,रवि कुमार, राजकुमार प्रसाद आदि उपस्थित थे।














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