सफलता की कहानी खुले खेत में खिला गुलाब, बदली किस्मत – पगारा के किसान प्रीतम सिंह लोधा की प्रेरक कहानी
गुना जिले से संवाददाता बलवीर योगी

गुना जिले के विकासखंड राघोगढ़ अंतर्गत ग्राम पगारा के किसान श्री प्रीतम सिंह लोधा ने यह सिद्ध कर दिखाया है कि अगर इरादे मजबूत हों और मार्गदर्शन सही मिले, तो सफलता के लिए पॉलीहाउस जैसी संरचनाएं भी जरूरी नहीं होतीं। खुले खेत में की जा रही गुलाब की खेती से वे आज प्रतिदिन हजारों रुपये कमा रहे हैं और क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्तंभ बन चुके हैं।
शुरुआत में प्रीतम सिंह केवल गेहूं और सोयाबीन की पारंपरिक खेती करते थे। सीमित आय और बढ़ती आवश्यकताओं के बीच जब जीवन संघर्षपूर्ण हो गया, तब उनकी मुलाकात उद्यानिकी विभाग राघोगढ़ के अधिकारियों से हुई। उन्होंने विभागीय योजनाओं और तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से श्री लोधा को गुलाब की खेती के लिए प्रेरित किया।
इस प्रयास में उपसंचालक उद्यान, श्री के.पी.एस. किरार की दूरदर्शिता और प्रेरणादायक मार्गदर्शन ने निर्णायक भूमिका निभाई। श्री किरार ने न केवल विभागीय योजनाओं की जानकारी दी, बल्कि इस बात पर भी बल दिया कि खुले खेत में भी आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक सलाह के साथ गुलाब की सफल खेती की जा सकती है।
प्रीतम सिंह ने दो बीघा से गुलाब की खेती शुरू की—बिना किसी पॉलीहाउस या संरक्षित संरचना के। मेहनत और तकनीक का संगम ऐसा रंग लाया कि आज वे 5 बीघा क्षेत्र में देसी गुलाब की खेती कर रहे हैं। प्रतिदिन ₹2000 से ₹3000 की आय प्राप्त हो रही है, यानी हर महीने लगभग ₹70,000 की आमदनी।
वे कहते हैं, “गुलाब की खेती ने न केवल मेरी आय बढ़ाई है, बल्कि मुझे आत्मनिर्भर बनाया है। आज मैंने अपने परिवार के लिए नया घर बनाया है, बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ा रहा हूं और गुलाब की महक से मेरा जीवन संवर गया है।”
प्रीतम सिंह लोधा अन्य किसानों को भी यह संदेश देते हैं कि “पारंपरिक फसलों के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाएं। गुलाब जैसी फसलें जहां दैनिक आमदनी देती हैं, वहीं कम भूमि में अधिक लाभ भी संभव है।”
श्री के.पी.एस. किरार, उपसंचालक उद्यान, का यह मानना है कि, “गुलाब अब केवल सजावट और सुगंध का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला एक सशक्त साधन बन चुका है। ऐसे प्रेरक किसानों की सफलता से जिले में उद्यानिकी का नया युग शुरू हुआ है।”
आज खुले खेतों में खिले गुलाबों की सुगंध पूरे गुना जिले को आत्मनिर्भरता और समृद्धि की राह दिखा रही है—और यह कहानी है मेहनत, मार्गदर्शन और उम्मीद की।

















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